पटना से सटे दानापुर इलाके में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर गंभीर बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। पिछले 11 दिनों की राहत के बाद दोबारा उपजी इस आपदा से दियारा क्षेत्र के जनजीवन पर भारी असर पड़ा है। गंगा नदी वर्तमान में खतरे के निशान से करीब दो फीट ऊपर बह रही है, जिसके चलते दियारा की सात पंचायतें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं और कई इलाके टापू में तब्दील हो गए हैं।
जलस्तर में लगातार वृद्धि और जलभराव
पिछले तीन दिनों के भीतर गंगा के जलस्तर में लगभग तीन फीट की तीव्र बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेजी से बढ़े पानी का असर निचले इलाकों की सड़कों और खेतों पर साफ दिखाई दे रहा है, जहां तीन से चार फीट तक पानी बह रहा है। कासीमचक सहित कई अन्य पंचायतों के स्थानीय निवासियों के घरों के अंदर डेढ़ से दो फीट तक पानी घुस चुका है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि लोगों को अपने आशियाने छोड़कर ऊंचे स्थानों और सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।


किसानों की बढ़ी मुश्किलें और चारे का संकट
इस आपदा ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। इससे पहले आई बाढ़ में सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर खड़ी मक्का, पशुचारा और विभिन्न प्रकार की मौसमी सब्जियां पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं। अब दोबारा जलस्तर बढ़ने से किसानों के समक्ष दोहरी मार पड़ी है। खेतों में पानी भर जाने के कारण मवेशियों के सामने भी हरे चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे पशुपालक खासे चिंतित हैं।
सरकारी संस्थानों और परिवहन व्यवस्था पर असर
बाढ़ का यह प्रकोप केवल रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों पर भी साफ नजर आ रहा है। विशुनपुर अस्पताल परिसर, दर्जनों सरकारी स्कूल और अकिलपुर थाना परिसर पूरी तरह पानी से घिर गए हैं। दियारा क्षेत्र के 49 प्रभावित स्कूलों में तैनात शिक्षक-शिक्षिकाएं अपनी जान जोखिम में डालकर और स्टीमर के जरिए स्कूल पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि स्टीमर तक पहुंचने के लिए भी उन्हें घुटने भर पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। इसके अलावा, परिवहन व्यवस्था चरमराने के कारण स्थानीय ऑटो और जीप चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूलने की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
बिजली आपूर्ति ठप और प्रशासनिक एहतियात
सुरक्षा के मद्देनजर बिजली विभाग ने बुधवार सुबह से ही दियारा की सभी सात प्रभावित पंचायतों में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी है, जिससे पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब गया है। उधर, गंगा का पानी नालों के रास्ते शहरी इलाकों और सेना क्षेत्र में प्रवेश न कर सके, इसके लिए जल संसाधन विभाग ने सभी स्लुइस गेटों और फाटकों को बालू की बोरियों से मुस्तैदी से बंद कर दिया है। इसके साथ ही देवनाला के मुहाने को भी सील कर दिया गया है।
प्रशासनिक चौकसी और राहत की मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अंचल अधिकारी (CO) ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी लगातार दियारा क्षेत्र की जमीनी हकीकत का जायजा ले रहे हैं। इसके साथ ही एसडीआरएफ की टीमों को भी बाढ़ प्रभावित छह पंचायतों में राहत और बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री, आपदा प्रबंधन मंत्री, जिलाधिकारी और एसडीओ से तत्काल प्रभाव से युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने की पुरजोर मांग की है।



