दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं और असिस्टेंट प्राक्टर के बीच विवाद हो गया, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति संभाली. कुलपति केपी सिंह ने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आने के बाद छात्र और शिक्षक दोनों के हित में फैसला लिया जाएगा.
गोरखपुर. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में मंगलवार को छात्र आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं और असिस्टेंट प्राक्टर वेद प्रकाश राय के बीच विवाद हो गया. प्रशासनिक भवन के सामने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से बातचीत के दौरान मामला बढ़ गया और हाथापाई की स्थिति बन गई. हंगामे के बीच विश्वविद्यालय में तैनात गार्डों ने असिस्टेंट प्राक्टर को छात्रों के बीच से बाहर निकाला. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जबकि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया.
बातचीत के दौरान बढ़ा विवाद
छात्र आंदोलन को खत्म कराने के उद्देश्य से मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे असिस्टेंट प्राक्टर वेद प्रकाश राय प्रशासनिक भवन पहुंचे थे. यहां छात्र नेता सतीश प्रजापति और उज्जवल सिंह भूख हड़ताल पर बैठे थे. असिस्टेंट प्राक्टर ने दोनों छात्र नेताओं और अन्य छात्रों से उनकी मांगों को लेकर बातचीत शुरू की.
बातचीत के दौरान असिस्टेंट प्राक्टर लगातार यह कहते रहे कि विश्वविद्यालय में नए कुलपति आए हैं और उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद छात्रों की मांगों को उनके सामने रखा जाएगा. इसी दौरान बातचीत आगे बढ़ी और विवाद की स्थिति बन गई.
हंगामे के बीच वेद प्रकाश राय छात्रों के बीच से बाहर निकलते हुए दिखाई दिए. उन्हें पकड़ने के लिए कुछ छात्र पीछे दौड़े, इसी दौरान कुछ छात्र गिर भी पड़े. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और सख्ती दिखाते हुए धरना दे रहे छात्रों को वहां से हटाया.
इस मामले में असिस्टेंट प्राक्टर वेद प्रकाश राय से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह उपलब्ध नहीं हो सके.
कुलपति ने कही निष्पक्ष बात
मामले पर विश्वविद्यालय के कुलपति केपी सिंह ने कहा कि घटना उनके संज्ञान में आई है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा.
कुलपति ने स्पष्ट किया कि जो भी फैसला होगा, वह छात्र हित और शिक्षक हित दोनों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.
25 अगस्त से चल रहा आंदोलन
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र समस्याओं और कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र नेताओं का आंदोलन 25 अगस्त से प्रशासनिक भवन के सामने चल रहा है. 5 सितंबर से छात्रों ने अपने धरने को भूख हड़ताल में बदल दिया.
छात्र नेता सतीश प्रजापति पिछले चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
सतीश प्रजापति के मुताबिक, पहले वह धरने के जरिए छात्रों की मांगें उठा रहे थे, लेकिन जब उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो भूख हड़ताल शुरू करने का फैसला लिया गया. उन्होंने नए कुलपति से समस्याओं के समाधान की उम्मीद जताई है.
छात्रों की प्रमुख मांगें
छात्र नेताओं की प्रमुख मांगों में निष्कासित किए गए छात्रों की बहाली शामिल है. उनका कहना है कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने और अपनी बात रखने वाले जिन छात्रों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई है, उसे वापस लिया जाना चाहिए.
इसके अलावा छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की है. उनका कहना है कि लंबे समय से चुनाव नहीं हुए हैं, लेकिन छात्रों से छात्रसंघ शुल्क लिया जा रहा है. इसी को लेकर उन्होंने जल्द छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग उठाई है.
छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में काम कर रही परीक्षा एजेंसी को लेकर भी सवाल उठाए हैं. इसके साथ ही डिग्री और अंकपत्र के नाम पर छात्रों से धन वसूली किए जाने के आरोपों की जांच कराने की मांग की गई है. छात्रों का कहना है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
हॉस्टल और पीएम-उषा पर सवाल
छात्र नेताओं ने हॉस्टल में मेस व्यवस्था और छात्रों को मिलने वाली अन्य मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार की मांग भी की है. उनका कहना है कि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण भोजन के साथ जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए.
विश्वविद्यालय में पीएम-उषा योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों को लेकर भी छात्र नेताओं ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने इन कार्यों के आवंटन में पारदर्शिता बरतने और योजना के तहत होने वाले कार्यों तथा उनके आवंटन की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है.
छात्र नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कई बार समस्याएं रखी जा चुकी हैं, लेकिन समाधान नहीं होने के कारण आंदोलन को भूख हड़ताल में बदलना पड़ा.



