केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा है कि भविष्य में दिल्ली की बसें नगर निगम के कचरे से तैयार हाइड्रोजन ईंधन (hydrogen fuel ) पर दौड़ सकती हैं। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि यह तकनीक पूरी तरह संभव है और आने वाले समय में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है। सोमवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा, “यह सब मुमकिन है। पिछले 50 वर्षों में ऐसा कभी नहीं हुआ कि मेरी कोई भविष्यवाणी सच साबित न हुई हो।” उन्होंने कहा कि कचरे को समस्या नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए और आधुनिक तकनीक के जरिए उससे स्वच्छ ईंधन तैयार किया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देना और उससे उपयोगी उत्पाद तैयार करना है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के ठोस कचरे से हाइड्रोजन, बायो-सीएनजी और अन्य वैकल्पिक ईंधन बनाए जा सकते हैं, जिससे प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। गडकरी ने यह भी जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 तक देशभर में कचरे के प्रभावी निस्तारण और उसके वैज्ञानिक उपयोग को लेकर व्यापक योजना तैयार की है। इस योजना का उद्देश्य कचरे के ढेर को समाप्त करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और वेस्ट-टू-वेल्थ (Waste to Wealth) मॉडल के जरिए ऊर्जा एवं ईंधन का उत्पादन बढ़ाना है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के जरिए कचरे को ऊर्जा में बदलना पूरी तरह संभव है और भारत इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दिल्ली भाजपा के एक युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा, “लोग पूछते हैं कि यह कैसे होगा? मेरा मानना है कि यह सब मुमकिन है। क्या बीते 50 वर्षों में ऐसा कभी हुआ है कि मेरी कोई भविष्यवाणी सच साबित नहीं हुई हो?” उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में कचरे से बनी हाइड्रोजन स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

केंद्रीय मंत्री ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना भी पेश की, जहां वाहनों को चलाने के लिए हाइड्रोजन का व्यापक इस्तेमाल होगा। उन्होंने कहा कि पानी से हाइड्रोजन तैयार की जा सकती है और यही ईंधन आने वाले वर्षों में पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों का प्रभावी विकल्प बन सकता है। उनका कहना था कि इससे प्रदूषण कम होगा, ऊर्जा के स्वदेशी स्रोत विकसित होंगे और आयातित ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी। गडकरी ने बताया कि केंद्र सरकार वर्ष 2027 तक देशभर में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और उसके उपयोग को बढ़ावा देने की व्यापक योजना पर काम कर रही है। इस योजना का उद्देश्य कचरे के ढेर को खत्म करना, उसे संसाधन में बदलना और वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल के जरिए स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि यदि कचरे के प्रबंधन और वैकल्पिक ईंधन उत्पादन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो इससे स्वच्छ भारत अभियान को नई गति मिलेगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और देश में हरित परिवहन व्यवस्था का विस्तार होगा।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान लैंडफिल साइटों से निकाले गए करीब 80 लाख टन कचरे का पहले ही उपयोग किया जा चुका है। अब अगले चरण में कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पृथक्करण (सेग्रिगेशन) किया जाएगा और बायो-डाइजेस्टर तकनीक के जरिए उससे हाइड्रोजन तैयार की जाएगी। उनका दावा है कि भविष्य में दिल्ली की बसें इसी हाइड्रोजन ईंधन से संचालित होंगी। गडकरी ने एक ऐसे भविष्य की भी कल्पना पेश की, जहां वाहनों को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन का इस्तेमाल होगा। उन्होंने कहा कि पानी से भी हाइड्रोजन बनाई जा सकती है और यह स्वच्छ, टिकाऊ तथा पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का बेहतर विकल्प बनकर उभरेगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार वर्ष 2027 तक पूरे देश से कचरे के ढेर खत्म करने की व्यापक योजना पर काम कर रही है। इस योजना के तहत कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, पुनर्चक्रण और उससे ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मॉडल को मजबूत किया जा सके।

कचरे से भी कमाई की अपार संभावनाएं

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कचरे से आय बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र में नगर निगम ट्रीट किए गए सीवेज (गंदे) पानी की बिक्री से हर साल करीब 325 करोड़ रुपये की कमाई कर रहा है। गडकरी ने कहा कि यदि कचरे और अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो यह केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम ही नहीं, बल्कि नगर निकायों के लिए आय का बड़ा स्रोत भी बन सकता है।

हाल ही में पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को लेकर उठी आलोचनाओं के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि अब बाजार में वैकल्पिक ईंधन पर चलने वाले वाहन भी उपलब्ध हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम होगी। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) के एक उप-क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि सरकार एथनॉल, मेथनॉल और बायोडीजल जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना था कि इससे न केवल पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

यूनीवार्ता की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा कि भारत इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माण के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि देश में निर्मित इलेक्ट्रिक स्कूटर अब विदेशी बाजारों में भी निर्यात किए जा रहे हैं, जो भारतीय ईवी उद्योग की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है। गडकरी ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाएं तैयार करना समय की मांग है। उनका मानना है कि हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित प्रौद्योगिकियों के विस्तार से न केवल हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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