विजय कुमार, जमुई। आस्था, लोक परंपरा और भक्ति के महान केंद्र के रूप में प्रसिद्ध सिकंदरा प्रखंड के महादेव सिमरिया स्थित पौराणिक बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले का विधिवत उद्घाटन जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस पावन अवसर पर दोनों शीर्ष अधिकारियों ने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर समस्त जिलेवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा और सम्मान समारोह
उद्घाटन के उपरांत जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर संपूर्ण मंदिर प्रांगण तथा पवित्र शिवगंगा सरोवर का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मेला परिसर में खेल, कला, साहित्य और अन्य विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्थानीय खिलाड़ियों एवं प्रबुद्ध व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, भूमि उप समाहर्ता, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के साथ-साथ क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, कवि, साहित्यकार और समाजसेवी उपस्थित रहे।

बिहार का देवघर और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जमुई की यह पावन धरा सदियों से आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र रही है, और महादेव सिमरिया का यह स्वयंभू मंदिर इस सांस्कृतिक धरोहर का एक दीप्तिमान स्तंभ है। बिहार का देवघर के रूप में विख्यात इस दिव्य धाम में भगवान शिव के उपलिंग स्वरूप के दर्शन के लिए पवित्र सावन मास में भारी संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
लोक मान्यताओं के अनुसार गिद्धौर राजवंश के राजा पूरणमल की असीम भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विश्वकर्मा ने रातों-रात इस भव्य मंदिर का निर्माण किया था। धनवे गांव के कुंभकार धनेश्वर पंडित को प्राप्त इस स्वयंभू शिवलिंग की पूजा-अर्चना में आज भी पारंपरिक रूप से कुंभकार समाज की सहभागिता बनी रहती है जो यहां की अनूठी सामाजिक समरसता और लोक-संस्कृति का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है। मंदिर के चारों ओर फैली पवित्र शिवगंगा और सामने अवस्थित गिद्देश्वर पर्वतमाला की श्रृंखलाएं जमुई को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाती हैं।
श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता प्रबंध और प्रशासन की अपील
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने जमुई की समृद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को नमन करते हुए कहा कि बाबा धनेश्वर नाथ धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि जिले की सांस्कृतिक आत्मा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित तथा आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करना है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की संभावना के मद्देनजर संपूर्ण मेला परिसर में बैरिकेडिंग, पेयजल आपूर्ति, चिकित्सा शिविर, साफ-सफाई, सीसीटीवी कैमरों और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती जैसे व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। अंत में प्रशासन द्वारा सभी श्रद्धालुओं से मेले की गरिमा, स्वच्छता और आपसी सौहार्द बनाए रखते हुए भगवान भोलेनाथ की आराधना करने की अपील की गई।


