दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने प्रॉपर्टी को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने की नीति को अंतिम रूप देने में दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA), हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री (MOHUA) और लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) की प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस विकास महाजन की डिवीजन बेंच ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों को अपनी प्रॉपर्टी के कन्वर्जन के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। अदालत ने कहा कि पिछले आदेश के बाद संबंधित विभागों की ओर से हुई प्रगति से वह बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है।
बेंच ने कहा कि अथॉरिटीज के बीच हुई बैठकों के मिनट्स से पता चलता है कि डॉक्यूमेंटेशन, कन्वर्जन चार्ज और प्रस्तावित नीति के कई पहलुओं पर अब तक स्पष्टता नहीं बन पाई है। अदालत ने MoHUA, DDA और L&DO को अपनी अंतिम नीति रिकॉर्ड पर रखने का आखिरी मौका दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से कम से कम तीन दिन पहले संबंधित विभाग अपनी फाइनल पॉलिसी अदालत के रिकॉर्ड पर पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। साथ ही, MoHUA के कैपिटल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी और DDA के वाइस चेयरमैन को भी कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश दिया गया है। अदालत उन मामलों की सुनवाई कर रही थी, जो अचल संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए DDA के पोर्टल से संबंधित हैं। यह पोर्टल फरवरी 2026 से बंद है, जिसके कारण प्रॉपर्टी कन्वर्जन के लिए आवेदन की प्रक्रिया रुकी हुई है।
नई पॉलिसी भविष्य के आवेदनों पर लागू होगी
बेंच ने साफ किया कि अधिकारियों की ओर से तैयार की जाने वाली नई पॉलिसी भविष्य में आने वाले मामलों पर लागू होगी। कोर्ट ने कहा कि बड़ी संख्या में कन्वर्जन आवेदन पहले से लंबित हैं। इनमें कई ऐसे आवेदन हैं, जिनके लिए DDA पहले ही कन्वर्जन चार्ज वसूल चुका है, लेकिन पोर्टल बंद होने के कारण उन पर आगे की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। अदालत ने अपने पहले के आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें बताया गया था कि 1,373 आवेदन लंबित थे और DDA इन आवेदनों के लिए कन्वर्जन चार्ज के रूप में 155.06 करोड़ रुपये पहले ही प्राप्त कर चुका था। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन आवेदनों के लिए कन्वर्जन चार्ज पहले ही जमा हो चुका है, उन्हें उस समय लागू पॉलिसी के मुताबिक ही प्रोसेस किया जाए।
पिछले फैसले का भी हवाला
बेंच ने ‘नीरा शर्मा बनाम दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी’ मामले में हाई कोर्ट के पहले के फैसले का भी हवाला दिया। उस मामले में अदालत ने स्पष्ट किया था कि यदि आवेदन के साथ कन्वर्जन चार्ज पहले ही जमा कर दिया गया है, तो केवल अथॉरिटी की ओर से आवेदन प्रोसेस करने में हुई देरी के कारण आवेदक पर बाद में बदली गई दरें लागू नहीं की जा सकतीं। मौजूदा बेंच ने कहा कि इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि कन्वर्जन पर वही चार्ज लागू होंगे, जो आवेदन जमा करने की तारीख पर प्रभावी थे। खास तौर पर तब, जब आवेदक संबंधित चार्ज पहले ही जमा कर चुका हो। अदालत की ये टिप्पणियां उस समय आईं, जब अधिकारियों ने MoHUA, DDA, L&DO और रेवेन्यू डिपार्टमेंट के बीच 14 अगस्त को हुई बैठक का ब्योरा रिकॉर्ड पर रखा। बैठक में डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया आसान बनाने, कन्वर्जन के चरणों को कम करने और कन्वर्जन चार्ज की समीक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
अब तक हुई प्रगति से संतुष्ट नहीं
बैठक में अधिकारियों ने माना था कि आवेदकों से मांगे जाने वाले कई दस्तावेजों में कुछ जानकारियां दोहराई जाती हैं। वहीं, कुछ दस्तावेज पुराने हो चुके हैं और कई जानकारियों का ऑनलाइन सत्यापन भी संभव है। ऐसे में अधिकारियों ने डॉक्यूमेंटेशन की जरूरतों की समीक्षा कर उन्हें कम करने और जहां संभव हो, ऑनलाइन वेरिफिकेशन अपनाने पर सहमति जताई थी। बैठक में कन्वर्जन प्रक्रिया को भी आसान बनाने पर चर्चा हुई, ताकि आवेदकों के लिए प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो, प्रोसेसिंग में लगने वाला समय कम हो और उन पर नियमों का अनावश्यक बोझ न पड़े। इसके अलावा मौजूदा कन्वर्जन चार्ज की पूरी तरह समीक्षा करने का प्रस्ताव भी रखा गया। अधिकारियों ने दस्तावेजों, प्रक्रिया और कन्वर्जन चार्ज की समीक्षा कर एक व्यापक पॉलिसी तैयार करने के लिए 31 दिसंबर तक का समय मांगा था। हालांकि, हाई कोर्ट ने अब तक हुई प्रगति पर असंतोष जताते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक आवेदकों को अनिश्चितता में नहीं रखा जा सकता।
अंतिम पॉलिसी रिकॉर्ड पर रखें
कोर्ट ने कहा कि भले ही मीटिंग के मिनट्स में यह उल्लेख किया गया था कि मौजूदा पॉलिसी को होल्ड पर रखने से लीजहोल्डर्स को तय प्रक्रिया के तहत अपनी प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने, गिफ्ट करने, विरासत में देने या गिरवी रखने से नहीं रोका गया है, लेकिन सुनवाई के दौरान कोई भी वकील अदालत को यह स्पष्ट नहीं कर सका कि लीजहोल्ड प्रॉपर्टी को ट्रांसफर करने की मौजूदा प्रक्रिया क्या है। DDA के वाइस चेयरमैन ने कोर्ट को बताया कि DDA और L&DO के बीच इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है और दोनों विभाग दो हफ्ते के भीतर अपनी सिफारिशें सौंप देंगे। हालांकि, अदालत ने मामले में अब तक बनी स्पष्टता की कमी पर असंतोष जताया। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले अपनी अंतिम पॉलिसी रिकॉर्ड पर रखें, ताकि लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन और प्रॉपर्टी ट्रांसफर की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
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