दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने निजी स्कूलों में काम करने वाले कर्मचारियों के हित में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी निजी स्कूल के कर्मचारी को शिक्षा निदेशक (Director of Education) की पूर्व मंजूरी के बिना नौकरी से हटाने का आदेश वैध नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 8(2) का उल्लंघन है। कोर्ट ने अपने फैसले में निजी स्कूलों को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा है कि बिना सरकारी सहायता वाले निजी स्कूल भी किसी कर्मचारी को नौकरी से हटाने या दंड देने से पहले शिक्षा निदेशक की मंजूरी लेना अनिवार्य है। मामला साईं मेमोरियल गर्ल्स स्कूल की सहायक शिक्षिका से जुड़ा है। अपीलकर्ता स्कूल में सहायक शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। उनके खिलाफ आरोपपत्र जारी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई थी। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 8(2) के तहत किसी भी गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल में कार्यरत कर्मचारी को हटाने या बड़ी सजा देने से पहले शिक्षा निदेशक की अनुमति लेना जरूरी है।

एकलपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया था

जानकारी के अनुसार, शिक्षिका के खिलाफ जारी आरोपपत्र में काम ठीक से नहीं करने, सहकर्मियों के साथ अनुचित व्यवहार करने और अंग्रेजी की बुनियादी जानकारी नहीं होने जैसे आरोप लगाए गए थे। मामले की जांच के लिए एक जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था, जिसने आरोपों को सही पाया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने शिक्षिका को नौकरी से हटाने का आदेश जारी कर दिया। शिक्षिका ने इस फैसले को दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल में चुनौती दी, लेकिन ट्रिब्यूनल ने उनकी अपील खारिज कर दी।

इसके बाद शिक्षिका ने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि, मामले की आगे की सुनवाई में हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों में कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया और दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 8(2) के प्रावधानों पर महत्वपूर्ण विचार किया। कोर्ट ने कहा कि बिना शिक्षा निदेशक की मंजूरी के कर्मचारी को हटाने की कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं है।

शिक्षिका ने हाई कोर्ट की खंडपीठ में दी चुनौती

एकलपीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद शिक्षिका ने न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की। अपीलकर्ता शिक्षिका की ओर से तर्क दिया गया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा नौकरी से हटाने का आदेश जारी करने से पहले शिक्षा निदेशक से लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य था। उन्होंने दलील दी कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 8(2) के तहत यह मंजूरी जरूरी प्रावधान है। शिक्षिका ने अदालत के सामने कहा कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया गया, इसलिए यह आदेश वैध नहीं माना जा सकता।

स्कूल की दलील खारिज

सुनवाई के दौरान स्कूल प्रबंधन ने अदालत में दलील दी कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट विस्तृत और तर्कपूर्ण थी। स्कूल ने कहा कि अनुशासनात्मक प्राधिकरण जांच अधिकारी के निष्कर्षों से सहमत था और शिक्षिका को अपना पक्ष रखने तथा समर्थन में दस्तावेज पेश करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसका इस्तेमाल नहीं किया। हालांकि, हाई कोर्ट की खंडपीठ ने स्कूल की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने शिक्षिका को नौकरी से हटाने के आदेश को गलत करार देते हुए कहा कि सेवा समाप्ति की कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

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