चंकी वाजपेयी, इंदौर। लसूड़िया इलाके में स्थित एक इलेक्ट्रिक गाड़ियों के शोरूम में शुक्रवार को भीषण आगजनी हो गई। इस घटना ने कई परिवारों की जान आफत में डाल दी। पड़ोसियों ने बड़ी मशक्कत कर सभी को सुरक्षित निकाला।
EV शोरुम की आग फ्लेट तक पहुंची
दरअसल, खालसा चौक के पास स्थित काइनेटिक ग्रीन इलेक्ट्रिक वाहन (EV) शोरूम में सुबह आग लग गई। इसके ऊपर बने फ्लैट में करीब 20 परिवार रहते हैं। घटना के वक्त सभी सो रहे थे। आग इतनी भयानक थी कि तेजी से फैलते हुए ऊपर बने फ्लैट तक पहुंचने वाली थी। उसका धुआं घरों में फैलते ही लोगों की नींद टूटी और मंजर देख चीख पुकार मच गई।
सीढ़ियों के सहारे रहवासियों ने किया रेस्कयू
लोगों ने बाहर की तरफ देखा तो शोरूम से आग की ऊंची लपटें उठती देख जान बचाने की गुहार लगाने लगे। आग ने सीढ़ियों को भी जद में ले लिया था जिससे वे बाहर नहीं निकल पाए और अपने फ्लैट में ही फंसकर रह गए। लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के रहवासी तुरंत मदद के लिए पहुंचे। उन्होंने सीढ़ियों और रस्सियों का इंतजाम किया और पास की मल्टी स्टोरी बिल्डिंग की छत से संपर्क बनाकर रेस्क्यू शुरू किया।
इलेक्ट्रिक वाहन जलकर खाक
पड़ोसियों ने दोनों इमारतों की छतों के बीच सीढ़ियां जोड़कर अस्थायी रास्ता तैयार किया। इसके जरिए कई लोगों को सुरक्षित दूसरी छत पर पहुंचाया गया, जबकि कुछ लोगों को रस्सियों की सहायता से नीचे उतारा गया। आग फ्लैट्स तक नहीं पहुंची, जिससे घरों का सामान सुरक्षित बच गया। हालांकि शोरूम में रखे सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए।
12 से 15 लोग घरों में फंसे थे
मल्टी में लगी आग के चलते 12 से 15 लोग घरों में फंस गए थे जिन्हें पुलिस रहवासियों और फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने समय रहते सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया, वहीं दो टैंकर पानी की मदद से करीब एक घंटे में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। बताया जा रहा है कि किसी ने कार चार्जिंग पर रखा था, जिसकी वजह से शॉर्ट सर्किट हुआ और यह हादसा हो गया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
दिल्ली हादसे के बाद भी नहीं लिया सबक
दिल्ली के होटल में हुए अग्निकांड ने 21 लोगों की जान ले ली। लेकिन इसके बाद भी लोगों ने न ही सबक सीखा और न ही ऐसी परिस्थिति में बचने का कोई तरीका निकाला।
फायर सेफ्टी को लेकर मल्टी निर्माण के समय NOC दी की जाती है। लेकिन कई जगहों पर इस तरह की लापरवाहियां देखने को मिल रही है। जहां पर ना ही आपातकालीन मल्टी से निकलने के लिए मार्ग सुनिश्चित होता है और ना ही फायर सेफ्टी को लेकर उचित कदम उठाए जाते हैं। दिल्ली हादसे के बावजूद भी कोई बड़ा अभियान नहीं होता है।

