दिल्ली में पुराने कपड़ों को रखने या उन्हें उचित तरीके से निपटाने की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) के अर्पण केंद्र उपयोगी विकल्प बनकर सामने आए हैं। दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बनाए गए इन केंद्रों में लोग अपने पुराने और इस्तेमाल में नहीं आने वाले कपड़े जमा करा सकते हैं। इन केंद्रों पर जमा किए गए कपड़ों को सीधे कचरे में नहीं भेजा जाता, बल्कि उन्हें दोबारा उपयोग, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसके बाद पुराने कपड़ों को विभिन्न उपयोगी सामग्रियों में बदला जाता है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, अर्पण केंद्रों के जरिए लोग अपने पुराने और उपयोग में नहीं आने वाले कपड़ों को उचित स्थान पर जमा करा सकते हैं। इन कपड़ों को दोबारा उपयोग और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया के जरिए उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है। रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल कपड़ा कचरे को कम करने के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पुराने कपड़ों को फेंकने के बजाय उन्हें पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया में शामिल करने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

10 अर्पण केंद्रों पर 41 टन से अधिक कपड़े जमा, 3,940 लोगों ने दिया योगदान

दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्रों पर पुराने कपड़े जमा कराने को लेकर लोगों की अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है। 31 अगस्त तक 10 अर्पण केंद्रों पर कुल 3,940 लोगों ने 41,181.59 किलोग्राम यानी 41 टन से अधिक कपड़े जमा कराए। इन कपड़ों को दोबारा उपयोग, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग के जरिए उपयोगी उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।आंकड़ों के मुताबिक, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल अर्पण केंद्र पर सबसे ज्यादा 9,861.40 किलोग्राम कपड़े जमा हुए। इसके बाद शालीमार बाग केंद्र पर 9,761.03 किलोग्राम कपड़ों का संग्रह हुआ। पंजाबी बाग पश्चिम में 6,534.98 किलोग्राम और शाहदरा केंद्र पर 6,386.08 किलोग्राम कपड़े जमा किए गए। वहीं, मयूर विहार-1 केंद्र पर 5,189.40 किलोग्राम, हौज खास में 1,680.70 किलोग्राम और द्वारका-ककरोला में 689.40 किलोग्राम कपड़ों का संग्रह हुआ। मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम कपड़े जमा किए गए।

अलग-अलग चरणों में शुरू हुए केंद्र

दिल्ली मेट्रो के 10 अर्पण केंद्र अलग-अलग चरणों में शुरू किए गए हैं। इनमें से पांच केंद्र 3 अगस्त को शुरू हुए थे, जबकि बाकी केंद्र 12 और 17 अगस्त को चालू किए गए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान देने के साथ-साथ उन्हें पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग के जरिए उपयोगी उत्पादों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

रग से लेकर बैग और की-रिंग तक बन रहे उपयोगी उत्पाद

दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्रों पर जमा किए जा रहे पुराने कपड़ों को बेकार मानकर फेंका नहीं जा रहा है, बल्कि उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर दोबारा उपयोग और रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा है। प्राप्त सामग्री का एक हिस्सा पुनः उपयोग और अपसाइक्लिंग के लिए अलग किया जाता है, जबकि बड़ी मात्रा को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, अब तक करीब 4,266 किलोग्राम सामग्री को पुनः उपयोग/अपसाइक्लिंग और 29,424 किलोग्राम सामग्री को रीसाइक्लिंग के लिए अलग किया गया है। इस प्रक्रिया के जरिए पुराने कपड़ों को नए उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है।

स्वयं सहायता समूह तैयार कर रहे उपयोगी सामान

अर्पण केंद्रों पर जमा कपड़ों से स्वयं सहायता समूहों की मदद से रग, फोल्डर, की-रिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसे कई उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को अर्पण केंद्रों पर प्रदर्शित भी किया गया है, ताकि लोग पुराने कपड़ों के दोबारा इस्तेमाल की संभावनाओं को देख सकें।

जनवरी 2027 में खुलेंगे 10 और केंद्र

दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्रों पर पुराने कपड़ों को उपयोगी उत्पादों में बदलने के साथ उनकी बिक्री भी की जा रही है। अब तक 10 अर्पण केंद्रों से तैयार उत्पादों की कुल 27,036 रुपये की बिक्री दर्ज की गई है। इससे यह पहल केवल पुराने कपड़ों के संग्रह तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उन्हें नए उत्पादों में बदलकर उपयोग में लाने की व्यवस्था भी विकसित हो रही है। अर्पण केंद्रों की पहुंच बढ़ाने के लिए अब 10 और केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित नए केंद्र जनवरी 2027 में शुरू किए जाने हैं। इनमें मॉडल टाउन, आईएनए, आईपी एक्सटेंशन, पश्चिम विहार पश्चिम, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी पश्चिम, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर-10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।

दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान और उनके पुनः उपयोग की दिशा में प्रभावी पहल के तौर पर सामने आए हैं। इन केंद्रों पर लोग अपने पुराने और उपयोग में नहीं आने वाले कपड़े जमा करा सकते हैं, जिन्हें आगे दोबारा उपयोग, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान देने के साथ-साथ उन्हें पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। उन्होंने कहा कि दिल्लीवासियों की भागीदारी से इस व्यवस्था को और व्यापक बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार का प्रयास है कि लोगों के लिए पुराने कपड़े देने की सुविधा सहज और सुलभ हो। साथ ही इन कपड़ों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और हरित बनाने के प्रयासों को और मजबूती मिल सके।

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