दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) को बेदखली नोटिस मिलने के बाद अब एक और प्रतिष्ठित क्लब पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने लुटियंस दिल्ली स्थित दिल्ली रेस क्लब (Delhi Race Club) से जुड़ी याचिका पर बड़ा फैसला सुनाते हुए उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बेदखली से संबंधित “कारण बताओ नोटिस” पर रोक लगाई गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद दिल्ली रेस क्लब को 84 एकड़ जमीन से बेदखल किए जाने की प्रक्रिया का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार, मामला लुटियंस दिल्ली (Lutyens’ Delhi) के उस बेहद कीमती भूखंड से जुड़ा है, जहां लंबे समय से क्लब का संचालन हो रहा है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब क्लब की जमीन से संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई के रास्ते और साफ हो गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने केंद्र सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए दिल्ली रेस क्लब को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया। पीठ ने 26 अप्रैल को सिंगल जज बेंच द्वारा दिए गए उस आदेश को बरकरार रखने से मना कर दिया, जिसमें क्लब को बेदखली से जुड़े नोटिस पर रोक लगाई गई थी। इसके साथ ही अदालत ने लुटियंस दिल्ली स्थित 84 एकड़ परिसर से दिल्ली रेस क्लब की प्रस्तावित बेदखली के मामले में जारी कारण बताओ नोटिस पर लगी रोक को भी हटा दिया।
पीठ ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की अपील को स्वीकार किया जाता है और सिंगल जज बेंच का 24 अप्रैल 2026 का आदेश रद्द किया जाता है। उस आदेश में संपदा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस पर आगे की कार्रवाई करने से रोका गया था, जिसे अब अदालत ने हटाने का निर्णय दिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा 13 मार्च को जारी किए गए नोटिस का आधार भी सामने आया, जिसमें दिल्ली रेस क्लब पर लुटियंस दिल्ली स्थित परिसर पर कथित तौर पर अनधिकृत कब्जे का आरोप लगाया गया था। केंद्र ने यह भी कहा था कि यह जमीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक है और उसी आधार पर परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा मांगा गया था।
अधिकारियों ने इस विवादित जमीन को लेकर पहले ही सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी थी। जानकारी के अनुसार, 17 अप्रैल को संपदा अधिकारियों ने क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें पूछा गया था कि उसके खिलाफ बेदखली और अनधिकृत कब्जे के लिए हर्जाने की वसूली का आदेश क्यों न पारित किया जाए। इसके बाद दिल्ली रेस क्लब ने इस नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ के समक्ष चुनौती दी थी। अदालत ने अंतरिम आदेश में संपदा अधिकारी को 30 जुलाई तक आगे की कार्रवाई करने से रोक दिया था।
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