दिल्ली के कमर्शियल वाहन चालकों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। दिल्ली का पहला पूर्णत: ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर (ATS) अब तैयार हो चुका है। इसके शुरू होने के बाद कमर्शियल वाहन मालिकों और चालकों को फिटनेस टेस्ट कराने के लिए दिल्ली से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यह अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर(Automated Testing Center) नंदनगरी डिपो परिसर में बनाया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) इसी माह इसका लोकार्पण कर सकती हैं। इसे लेकर DTC ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। इस सेंटर में कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच पूरी तरह स्वचालित तकनीक से की जाएगी। वाहन की ब्रेकिंग सिस्टम, प्रदूषण स्तर, हेडलाइट, सस्पेंशन, स्टीयरिंग और अन्य तकनीकी मानकों की जांच मशीनों के जरिए होगी।
72 हजार वाहनों की हो सकेगी जांच
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अत्याधुनिक ATS में हर साल लगभग 72 हजार वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण जांच की जा सकेगी। इस केंद्र के शुरू होने से कमर्शियल वाहन चालकों को फिटनेस टेस्ट के लिए दिल्ली से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। DTC द्वारा विकसित इस स्टेशन में वाहनों की जांच के लिए 4 ऑटोमेटिक लेन बनाई गई हैं। इनमें 2 लेन भारी वाहनों के लिए निर्धारित की गई हैं, जबकि एक-एक लेन हल्के वाहनों और दोपहिया वाहनों के लिए होगी।
हालांकि फिलहाल दिल्ली में दोपहिया वाहनों की फिटनेस जांच का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस केंद्र में दोपहिया वाहनों के परीक्षण के लिए भी अलग लेन तैयार की गई है। अभी इस लेन का इस्तेमाल हल्के वाहनों की जांच के लिए किया जाएगा। फिलहाल दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच के लिए झुलझुली स्थित एक टेस्टिंग सेंटर संचालित है, लेकिन वह पूरी तरह ऑटोमेटेड नहीं है।
चंद मिनटों में होगी जांच
नंदनगरी डिपो परिसर में तैयार दिल्ली के पहले पूर्णत: ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर (ATS) में मशीनों और कंप्यूटर आधारित तकनीक से वाहनों की जांच चंद मिनटों में पूरी हो सकेगी। यहां कंप्यूटर और आधुनिक मशीनों की मदद से ब्रेक, सस्पेंशन, अंडरबॉडी इंस्पेक्शन, हेडलाइट एलाइनमेंट और प्रदूषण स्तर (एमिशन चेक) की सटीक जांच की जाएगी। DTC के अधिकारियों के मुताबिक, यदि वाहन सभी निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है तो उसे लगभग 10 से 12 मिनट के भीतर फिटनेस जांच प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। वहीं, तय मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों को टेस्ट में फेल घोषित किया जाएगा और उन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।
ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर के प्रमुख फायदे
तेज जांच प्रक्रिया: जहां मैन्युअल टेस्टिंग में घंटों का समय लग जाता है, वहीं ऑटोमेटेड सेंटर में कुछ ही मिनटों में वाहन के कई हिस्सों जैसे ब्रेक, लाइट, व्हील एलाइनमेंट और सस्पेंशन की जांच एक साथ हो सकेगी।
कम समय लगेगा: प्रक्रिया तेज होने से टेस्टिंग सेंटरों पर लंबी कतारों की समस्या कम होगी। इससे वाहन चालकों और ऑपरेटरों का काफी समय बचेगा।
मानवीय भूल की संभावना खत्म: कंप्यूटर और सेंसर आधारित जांच प्रणाली होने के कारण टेस्टिंग में मानवीय त्रुटि या पक्षपात की गुंजाइश लगभग नहीं रहेगी। इससे फिटनेस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
गहरी तकनीकी जांच: यह आधुनिक सिस्टम वाहन के उन सूक्ष्म तकनीकी दोषों को भी पकड़ सकेगा, जो सामान्य जांच के दौरान इंसानी आंखों से छूट जाते हैं।
सड़क सुरक्षा में सुधार: सटीक और वैज्ञानिक जांच के बाद केवल सुरक्षित वाहन ही सड़क पर चल सकेंगे। इससे तकनीकी खराबी के कारण होने वाले सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद है।
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