कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दायर शिकायत पर दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में आज सुनवाई हुई. इस मामले में शिकायतकर्ता वकील विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में अपनी दलील में कहा कि वो इस मामले में अभी सिर्फ पुलिस जांच की मांग कर रहे हैं. राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के मामले में एक हफ्ते में लिखित दलीलें मांगी हैं. शिकायतकर्ता के वरिष्ठ वकील ने अपनी दलीलें पूरी कर लीं और चुनाव आयोग की रिपोर्ट पेश करने की अनुमति भी मांगी. सोनिया गांधी के वकील भी अपने जवाब पेश करेंगे.
सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक हफ्ते के अंदर लिखित दलीलें पेश करने को कहा है. शिकायतकर्ता ने कोर्ट में भारतीय चुनाव आयोग की रिपोर्ट पेश करने की भी इजाजत मांगी है.
जब वोटर लिस्ट मे सोनिया गांधी का नाम शामिल किया गया था उस समय उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली थी . ऐसे में इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि धोखाधडी या जालसाजी के जरिए हासिल किए गए दस्तावेजों के आधार पर उनका नाम नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया गया हो. अगर चुनाव आयोग को गलत जानकारी देकर नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है तो वो भी कानूनन अपराध है. इसलिए कोर्ट को जांच का आदेश पुलिस को देना चाहिए.
याचिका के अनुसार, सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल, 1983 को औपचारिक रूप से भारतीय नागरिकता हासिल की थी. हालांकि, याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनका नाम 1980 में ही नई दिल्ली की मतदाता सूची में आ गया था. इससे उस दौरान चुनावी सूचियों में उनके नाम को शामिल किए जाने की वैधता पर सवाल उठते हैं. इन आरोपों का जवाब देते हुए, सोनिया गांधी ने कहा था कि उनके खिलाफ दायर आवेदन बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित है, और इसे कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया.
शिकायतकर्ता वकील विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में कहा कि उसने अपनी जवाबी दलीलें पूरी कर लीं. सोनिया गांधी के वकील ने भी कहा कि वह कुछ दलीलें पेश करना चाहते हैं. कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख तय की है.
सोनिया गांधी ने कहा था कि शिकायतकर्ता आरोपों को साबित करने के लिए कोई भी विश्वसनीय दस्तावेजी सबूत पेश करने में विफल रहा है. शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस डॉक्यूमेंट या सबूत पेश नहीं किए गए थे.
विकास त्रिपाठी नाम के शख्श की ओर से दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने 1983 में भारतीय नागरिकता लेने से तीन साल पहले ही फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए यहां की वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवा लिया था. शिकायतकर्ता ने इस मामले में पुलिस को जांच का निर्देश देने की मांग की थी. मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था. इस आदेश को याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी है.
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