देवघर। देवघर साइबर थाना पुलिस ने मंगलवार को साइबर ठगी के मामले में करीब आधा दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। गिरफ्तार आरोपितों में सारठ थाना क्षेत्र के पथरड्डा ओपी अंतर्गत उबिया गांव निवासी मनीष कुमार भी शामिल है। पुलिस जांच और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मनीष पिछले कई वर्षों से साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़ा था और धीरे-धीरे एक बड़े नेटवर्क का संचालन करने लगा।

पुलिस के अनुसार, मनीष पर फर्जी APK फाइल तैयार करने और युवाओं के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने से जुड़े गंभीर आरोप हैं।

सात-आठ साल पहले शुरू किया साइबर ठगी का खेल

बताया जाता है कि मनीष का परिवार पहले आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। उसके पिता मजदूरी करते थे और परिवार के पास खेती के लिए भी बहुत कम जमीन थी। परिवार बीपीएल श्रेणी में था।

आरोप है कि करीब सात-आठ साल पहले मनीष साइबर ठगी के धंधे में आया। इसके बाद उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदलती चली गई। वर्तमान में उसके पास गांव में सुविधाओं से युक्त मकान और कई वाहन होने की बात सामने आई है।पुलिस सूत्रों के मुताबिक देवघर, दुमका, दुर्गापुर और कोलकाता में भी उसकी संपत्ति होने की जानकारी मिली है।

फर्जी APK बनाने में माहिर होने का दावा

पुलिस जांच में मनीष के बारे में बताया गया है कि वह फर्जी APK फाइल तैयार करने में एक्सपर्ट था। पहले उसने खुद यह तरीका सीखा और बाद में दूसरे युवाओं को भी अपने नेटवर्क से जोड़ना शुरू किया।

सूत्रों के अनुसार, उसके नेटवर्क में 60 से अधिक युवक जुड़े हुए थे। ये युवक सारठ, पथरड्डा, पथरौल और मधुपुर थाना क्षेत्रों के अलग-अलग गांवों के बताए जा रहे हैं।

आरोप है कि मनीष इन युवाओं को फर्जी APK फाइल और मोबाइल नंबरों की सूची उपलब्ध कराता था। इसके बाद उसके नेटवर्क से जुड़े युवक लोगों को APK फाइल भेजते थे और मोबाइल में सेंध लगाकर साइबर ठगी करते थे।

कमीशन के बदले युवाओं से करवाता था काम

जांच के मुताबिक, ठगी की रकम में से मनीष को उसके नेटवर्क से जुड़े युवाओं से कमीशन मिलता था। इस तरह कथित तौर पर उसने एक संगठित नेटवर्क खड़ा कर लिया।

बताया जाता है कि मनीष पहले युवाओं को आर्थिक लालच देकर अपने संपर्क में लाता था। इसके बाद उन्हें कम समय में आसानी से पैसा कमाने का लालच दिया जाता था। नेटवर्क में शामिल होने के बाद उन्हें साइबर ठगी के तरीके सिखाकर काम कराया जाता था।

बड़े शहरों के महंगे होटलों से नेटवर्क चलाने का आरोप

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मनीष इलाके में बहुत कम दिखाई देता था। वह अपने साथियों के साथ कोलकाता और अन्य बड़े शहरों के महंगे होटलों में ठहरकर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित करता था।

पुलिस काफी समय से उस पर नजर रख रही थी और अब उसकी गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

गिरफ्तारी से बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद

पुलिस को आशंका है कि मनीष के नेटवर्क में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य युवाओं की पहचान और उनकी भूमिका की जांच कर रही है।

अगर जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मनीष की गिरफ्तारी से देवघर के साइबर ठगी नेटवर्क की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं।

साइबर थाना ने लोगों को किया अलर्ट

साइबर थाना पुलिस ने लोगों से मोबाइल और बैंकिंग से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। किसी अनजान व्यक्ति को बैंक खाते की जानकारी या OTP साझा न करें।

इसके अलावा मोबाइल पर आने वाले अनजान लिंक या APK फाइल पर क्लिक या इंस्टॉल न करें। संदिग्ध फाइल खोलने से मोबाइल और उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारी खतरे में पड़ सकती है।पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देने की अपील की है।