दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू (T.S. Sandhu) की नियमित समीक्षा और निर्देशों के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने जनहित से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन की लंबे समय से लंबित फाइलों का निपटारा कर दिया है। इससे राजधानी में रुकी हुई कई विकास परियोजनाओं का रास्ता साफ हो गया है। जानकारी के अनुसार, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण भूमि आवंटन से संबंधित कई फाइलें लंबे समय से लंबित थीं, जिसके चलते कई सार्वजनिक परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। उपराज्यपाल की समीक्षा के बाद इन मामलों में प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया गया और लंबित प्रस्तावों का निस्तारण किया गया।
जनहित की परियोजनाओं को मिलेगा गति
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल के बाद राजधानी में जनहित और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन का रास्ता साफ हो गया है। इससे लंबे समय से लंबित विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। अधिकारियों का कहना है कि कार्यभार संभालने के बाद से ही उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण विकास परियोजनाएं प्रभावित न हों और जनहित से जुड़े कार्य तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जा सकें।
अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने जनहित से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भूमि और आवश्यक मंजूरियां उपलब्ध कराई हैं। इसके तहत द्वारका सेक्टर-19 और मंगलापुरी में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय स्थापित करने के लिए सामुदायिक भवन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना हेतु 112 अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किए गए हैं। वहीं, जरूरतमंद लोगों को सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध कराने की योजना के तहत अटल कैंटीनों के लिए 5 एनओसी भी जारी की गई हैं।
पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए भी भूमि आवंटन
अधिकारियों के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को भी प्राथमिकता देते हुए होलंबी कलां में प्रस्तावित ई-वेस्ट इको मैनेजमेंट पार्क के लिए 8.5 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य राजधानी में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल निस्तारण की व्यवस्था को मजबूत करना है। वहीं, गाजीपुर में ठोस कचरा प्रबंधन क्षमता बढ़ाने के लिए वेस्ट-टू-एनर्जी और बायो-मीथनेशन परियोजनाओं के विस्तार हेतु नगर निगम (एमसीडी) को 10 एकड़ भूमि सौंपी गई है। इसके अलावा इन परियोजनाओं के विस्तार के लिए 10.4 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी आवंटित की गई है।
नए पुलिस थानों, फॉरेंसिक लैब और IB कार्यालयों के लिए भी जमीन आवंटित
अधिकारियों के अनुसार, राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिलकुशा बाग, सागरपुर, सूरजपुर और किशनगढ़ में नए पुलिस थानों के निर्माण के लिए भूमि आवंटित की गई है। इससे बढ़ती आबादी वाले क्षेत्रों में पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा नरेला में फॉरेंसिक साइंस लैब की स्थापना के लिए भी जमीन उपलब्ध कराई गई है। वहीं, धीरपुर और ताहिरपुर में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कार्यालयों के निर्माण के लिए भूमि आवंटित की गई है। न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से रोहिणी और शाहदरा में न्यायपालिका के कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए भी जमीन उपलब्ध कराई गई है।
मेट्रो, कचरा प्रबंधन और जल परियोजनाओं को भी मिली जमीन
अधिकारियों के अनुसार, राजधानी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सनोठ में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को मेट्रो डिपो के निर्माण हेतु 20 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। वहीं, नरेला में मेट्रो परियोजनाओं के लिए कास्टिंग यार्ड विकसित करने के लिए 16 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई है। कचरा प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम (MCD) को 24 फिक्स्ड कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन स्थापित करने हेतु भी भूमि आवंटित की गई है। इसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को जल एवं सीवरेज से जुड़ी कई परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई है। इसके तहत राजधानी के आठ स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और सीवेज पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 151 नए बोरवेल बनाने की भी मंजूरी दी गई है।
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