Dharmendra Gehlot Resigns BJP: अजमेर में नगर निकाय चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। अजमेर नगर निगम के दो बार मेयर रह चुके धर्मेंद्र गहलोत ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

गहलोत ने स्वायत्त शासन विभाग (DLB) की ओर से 18 अगस्त को जारी किए गए दो नोटिस को इस्तीफे की मुख्य वजह बताया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर चुनाव के समय दबाव बनाने के लिए नोटिस जारी करवाने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने भाजपा से उन्हें नागौर नगर परिषद चुनाव के प्रभारी पद से भी मुक्त करने की मांग की है।

DLB के दो नोटिस से नाराज थे गहलोत

धर्मेंद्र गहलोत ने गुरुवार को वीडियो जारी कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वायत्त शासन विभाग ने 18 अगस्त को दो अलग-अलग मामलों में उनसे जवाब मांगा है। गहलोत के मुताबिक, इनमें एक शिकायत साल 2021 की है, जब वह महापौर नहीं थे। दूसरा मामला उनके महापौर कार्यकाल से जुड़ा है और करीब 6-7 साल पुराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों को लेकर जारी किए गए पत्र उनकी छवि को धूमिल करने और चुनाव के समय दबाव बनाने की कोशिश हैं।

देवनानी से राजनीतिक और वैचारिक मतभेद का दावा

धर्मेंद्र गहलोत ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देवनानी के साथ उनके राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि देवनानी हमेशा दूसरे व्यक्ति को झुकाने या समाप्त करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने दावा किया कि अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए चुनाव के समय दबाव बनाने के लिए स्वायत्त शासन विभाग से इस तरह के पत्र जारी करवाए गए हैं।

गहलोत ने कहा कि अगर चुनाव के दौरान कांग्रेस इन मामलों को मुद्दा बनाती है तो इससे भाजपा भी कठघरे में आ सकती है। उन्होंने कहा कि यह उनकी और देवनानी की व्यक्तिगत लड़ाई है और वह नहीं चाहते कि दोनों की लड़ाई के बीच भाजपा पर किसी तरह का सवाल उठे।

नागौर चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी भी छोड़ी

धर्मेंद्र गहलोत को भाजपा ने नागौर नगर परिषद के आगामी चुनाव के लिए प्रभारी बनाया था। इस्तीफे के साथ उन्होंने इस जिम्मेदारी से भी मुक्त करने की मांग की। उन्होंने भाजपा नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वह इसे निभाने की स्थिति में नहीं हैं।

कहा- मिटने को तैयार, झुकने को नहीं

गहलोत ने कहा कि DLB की ओर से जारी पत्र उनकी छवि खराब करने के लिए हैं। उन्होंने कहा कि वह मन पर पत्थर रखकर यह फैसला ले रहे हैं और जब तक मामले का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने वासुदेव देवनानी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें अभी अच्छी तरह पहचाना नहीं है। गहलोत ने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति के शिष्य हैं, जो आज तक किसी के सामने नहीं झुके। उन्होंने कहा, धर्मेंद्र गहलोत मिटने को तैयार है, लेकिन झुकने को तैयार नहीं है। गहलोत ने यह भी कहा कि यह लड़ाई धर्मेंद्र गहलोत और वासुदेव देवनानी के बीच है और यह आगे भी जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने भाजपा से अपने फैसले के लिए क्षमा मांगी।

13 कॉमर्शियल नक्शों की मंजूरी का मामला

धर्मेंद्र गहलोत के मेयर रहते करीब 6 साल पहले 13 कॉमर्शियल नक्शों की फाइलों को मंजूरी देने का मामला सामने आया था। इस मामले में राज्य सरकार ने तत्कालीन महापौर गहलोत को राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 39 के तहत नोटिस जारी किया था।

गहलोत ने इस नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

उन पर आरोप था कि उन्होंने नियमों के खिलाफ जाकर निगम के उपायुक्त से 13 कॉमर्शियल नक्शों की फाइलों को मंजूरी दिलवाई। शिकायत मिलने के बाद तत्कालीन एडीएम सिटी अशोक योगी की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन भी किया गया था।

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