कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बयान देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। शिक्षा विभाग की संसदीय समिति के वे लगभग पौने दो साल अध्यक्ष रहे है,दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि वहाँ इतने घपले और गड़बड़ी है,जिन्हें बयां नहीं किया जा सकता है।
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दिग्विजय ने कहा कि नेशनल टेस्ट एजेंसी (NTA) के प्रदीप जोशी अध्यक्ष है, जो कि आरएसएस के प्रचारक के रूप में है। उनकी गलत नियुक्ति की गई। तत्कालीन गवर्नर महावीर जी ने 2002 में जबलपुर में की थी, मैंने उस वक्त आपत्ति की थी फिर हमारी सरकार गिर गई फिर प्रदीप जोशी जी को मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन का अध्यक्ष बना दिया गया। वहां पर रहते हुए उन्होंने प्रोफेसर की नियुक्तियों में बड़ा घपला किया,जिसकी जांच शिवराज सिंह चौहान साहब ने कराई थी। घपले में वह दोषी भी पाए गए,लेकिन जिस अधिकारी ने जांच की थी उसका तबादला कर दिया गया। उसके बाद जब हमारा दबाव बढ़ा बाद तो उनका इस्तीफा लेकर उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य में पब्लिक सर्विस कमीशन का अध्यक्ष बना दिया गया, वहां घपला किया तो वहां भी इस्तीफा दिया। दिल्ली गए तो वहां उन्हें यूपीएससी का चेयरमैन बना दिया गया,वहां से रिटायर हुए तो NTA जो NEET और JEE का एग्जाम कराती है,उसके अध्यक्ष के रूप में चले गए और जब से वह गए तब से नीट का पर्चा उजागर होने लगा।
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दिग्विजय ने कहा कि संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में मैने उन्हें मीटिंग में बयान देने के लिए बुलाया,जब मैंने पूछा कि आपके रहते हुए कैसे हुआ,तो वह कहने लगे कि मेरे पास कोई अधिकार ही नहीं है। तो सबसे पहले इस्तीफा NTA के चेयरमैन का ही होना चाहिए था। उनका इस्तीफा क्यों नही लिया गया, मोदी जी का बयान है कि उन्होंने 48 लोग बर्खास्त कर दिए हैं। हकीकत में सबसे पहले धर्मेंद्र प्रधान और NTA के अध्यक्ष प्रदीप जोशी को करना चाहिए,क्योंकि वह आरएसएस के प्रचारक है।
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