वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। हाईकोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायक को बिना कारण बताओ नोटिस व सुनवाई का अवसर दिए सेवा से हटाए जाने को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताते हुए संबंधित आदेश को निरस्त कर दिया है। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता को आर्थिक लाभ प्रदान करने के निर्देश भी दिए हैं।

मामले के अनुसार, बिलासपुर जिले के जनपद पंचायत तखतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत जरौंधा में पदस्थ ग्राम रोजगार सहायक नीता बाई डाहीरे को कथित अनियमितताओं एवं फर्जी मस्टर रोल तैयार करने के आरोप में सेवा से हटा दिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने न्यायालय को बताया कि हटाने की कार्रवाई से पूर्व न तो कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया गया। बल्कि सेवा समाप्ति के लगभग तीन माह बाद नोटिस जारी किया गया।

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सुनवाई के दौरान राज्य शासन एवं सीईओ जनपद पंचायत तखतपुर के अधिवक्ता ने आरोपों के आधार पर की गई कार्रवाई को उचित ठहराने का प्रयास किया, किंतु न्यायालय ने पाया कि सेवा समाप्ति का आदेश आरोपों पर आधारित एवं कलंककारी (Stigmatic) प्रकृति का था। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना की गई कार्रवाई विधिसम्मत नहीं मानी जा सकती। न्यायालय ने सेवा समाप्ति आदेश को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता को निर्धारित अवधि के वेतन एवं अन्य आर्थिक लाभ 45 दिनों के भीतर प्रदान करने का निर्देश दिया है। साथ ही जनपद पंचायत को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता भी दी गई है। यह निर्णय संविदा कर्मचारियों के अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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