हकीमुद्दीन नासिर, महासमुंद। मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल महासमुंद का बायो मेडिकल वेस्ट नगर पालिका के डंपिंग यार्ड में खुलेआम फेंका गया है। यह घटना तुमाड़बरी स्थित मणिकंचन (एसएलआरएम) सेंटर के डंपिंग यार्ड में हुई, जहां जनस्वास्थ्य सुरक्षा के कड़े नियमों का उल्लंघन किया गया।

नगर पालिका कर्मचारियों के विरोध के बावजूद कथित तौर पर अस्पताल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने तीन ट्रैक्टर बायो मेडिकल कचरा डंप कर दिया। डंपिंग यार्ड में सर्जिकल ग्लव्स, सिरिंज, नीडल, ड्रिप सेट, बैंडेज, दवाइयों के रैपर और टेबलेट सहित बड़ी मात्रा में संक्रमित सामग्री मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के संक्रमित कचरे को खुले में फेंकना संक्रमण फैलने का एक बड़ा कारण बन सकता है। यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।

नगर पालिका का एसएलआरएम सेंटर शहर के सामान्य ठोस कचरे के पृथक्करण, जैविक खाद निर्माण और अनुपयोगी कचरे के डंपिंग के लिए है। अस्पताल का बायो मेडिकल वेस्ट यहां फेंकने से खतरा कई गुना बढ़ गया है, क्योंकि डंपिंग यार्ड में मवेशियों, आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है। संक्रमित सामग्री के इनके संपर्क में आने से संक्रमण पूरे शहर में फैल सकता है।

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मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के संग्रहण और वैज्ञानिक निस्तारण का जिम्मा रायपुर की एसएमएस वाटर ग्रेस कंपनी को सौंपा गया है। इसके बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में बायो मेडिकल वेस्ट का नगर पालिका के डंपिंग यार्ड में पहुंचना अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पालिका कर्मचारियों ने जब अस्पताल के वाहनों को कचरा खाली करने से रोका और बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट डालना प्रतिबंधित है तो कथित तौर पर अस्पताल प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों ने कर्मचारियों से अभद्रता की। आरोप है कि कर्मचारियों के हटने के बाद तीन ट्रैक्टर कचरा डंप कर वाहन वापस लौट गए।

घटना की जानकारी मिलने पर मंगलवार शाम नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सौरभ शर्मा मौके पर पहुंचे और वहीं से मेडिकल कॉलेज के संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत महेश्वरी से फोन पर चर्चा की। अधीक्षक ने प्रारंभिक तौर पर इसे अस्पताल का सामान्य कचरा बताया। हालांकि सीएमओ ने मौके पर मौजूद सामग्री को बायो मेडिकल वेस्ट बताते हुए इस पर आपत्ति दर्ज कराई।

बुधवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की तीन सदस्यीय टीम ने डंपिंग यार्ड का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने वहां बायो मेडिकल वेस्ट की मौजूदगी स्वीकार की और उसे तत्काल उठाकर सुरक्षित निस्तारण कराने की बात कही। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया है।

नगर पालिका के सीएमओ सौरभ शर्मा ने पूरे मामले की जानकारी नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव को भेजते हुए आवश्यक मार्गदर्शन मांगा है। माना जा रहा है कि मामले में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और आगे की कार्रवाई को लेकर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।

वहीं, मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत महेश्वरी ने कहा कि अस्पताल से सामान्य कचरा भेजा गया था। उनके अनुसार उसमें सिरिंज, नीडल या ऐसी कोई सामग्री नहीं थी, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा हो। हालांकि डंपिंग यार्ड में मिले बायो मेडिकल वेस्ट और स्वास्थ्य विभाग की टीम के निरीक्षण के बाद अधीक्षक के दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन के लिए जब स्पष्ट नियम, अधिकृत एजेंसी और अलग व्यवस्था मौजूद है, तब आखिर अस्पताल का संक्रमित कचरा नगर पालिका के डंपिंग यार्ड तक कैसे पहुंचा? यदि पालिका कर्मचारियों की आपत्ति के बावजूद इसे जबरन डंप किया गया तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी? यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर खतरे का है। अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।

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