राजधानी दिल्ली में एक महिला ने एक निजी अस्पताल में हुई कथित मेडिकल लापरवाही को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, यह मामला अभी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है और केवल सोशल मीडिया पर किए गए दावों के आधार पर सामने आया है। महिला का दावा है कि गॉल ब्लैडर की सर्जरी के दौरान डॉक्टर से गलती हुई और कथित तौर पर एक गलत नस कट गई। इसके बाद स्थिति को लेकर जब सवाल पूछे गए तो डॉक्टर द्वारा कथित रूप से “यह अल्लाह की मर्जी है” जैसा जवाब देने का दावा भी किया गया है। यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूजर @MeghUpdates ने इस घटना से जुड़ी जानकारी साझा की। इसके बाद यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। लल्लूराम डॉट कॉम इस वायरल खबर की पुष्टि नहीं करता, यह खबर सोशल मीडिया दावों पर आधारित है।

हालांकि, यह मामला अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है और यह जानकारी वायरल पोस्ट और पीड़िता के दावे पर आधारित है। वायरल दावे के अनुसार, गॉल ब्लैडर सर्जरी के दौरान कथित रूप से एक गलती हुई थी, जिसके बाद मरीज ने इलाज करने वाले डॉक्टर से सवाल किया। पीड़िता नूर सबा ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि उन्होंने सर्जरी के दौरान डॉक्टर डॉ. मोहम्मद नदीम से पूछा था कि अगर प्रक्रिया के दौरान उनकी मृत्यु हो जाती तो क्या होता। इसके जवाब में, वायरल पोस्ट के अनुसार, डॉक्टर ने कहा कि यह “अल्लाह की मर्जी” होता। नूर सबा ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्होंने डॉक्टर से सीधे पूछा “अगर मैं मर जाती तो?” इस पर डॉक्टर द्वारा कथित तौर पर फिर से यही जवाब दिया गया कि “तो भी अल्लाह की मर्जी होती।”

गॉल ब्लॉडर निकालने का ऑपरेशन हुआ था

दिल्ली के शाहदरा इलाके के करदम पुरी निवासी एक महिला ने गाजियाबाद के लोनी स्थित एक निजी नर्सिंग होम में हुए ऑपरेशन के बाद गंभीर मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाया है। मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, नूर सबा नाम की महिला का 17 फरवरी 2026 को अल्वी नर्सिंग होम में गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) निकालने का ऑपरेशन हुआ था। परिवार के अनुसार, ऑपरेशन के लगभग 15 से 20 दिन बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और उन्हें पीलिया (जॉन्डिस) के लक्षण दिखाई देने लगे।

इसके बाद वह दोबारा उसी नर्सिंग होम में इलाज के लिए पहुंचीं, जहां जांच के बाद उन्हें पीलिया बताया गया और कुछ दिनों के लिए भर्ती किया गया। हालांकि परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर उनकी बीमारी का स्पष्ट कारण नहीं बता सके और इलाज से स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बाद में महिला ने दूसरे अस्पताल में सलाह ली, जहां कथित तौर पर उनकी हालत को सर्जरी से जुड़ी जटिलता से जोड़ा गया और आगे इलाज की जरूरत बताई गई। परिवार का दावा है कि ऑपरेशन के दौरान अंदरूनी नस को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई। मामले को लेकर यह भी आरोप सामने आए हैं कि जब मरीज ने अस्पताल से सवाल किया, तो डॉक्टर की ओर से विवादित प्रतिक्रिया दी गई, जिससे विवाद और बढ़ गया।

500 से 1000 रुपए में मामला निपटाने को कहा

शाहदरा (दिल्ली) के करदम पुरी निवासी नूर सबा के अनुसार, 17 फरवरी 2026 को नर्सिंग होम में उनका गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) का ऑपरेशन किया गया था। इसके कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें पीलिया जैसी समस्या हो गई। महिला का आरोप है कि बाद में डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि पिछली सर्जरी के दौरान एक नस कट गई थी, जिससे यह जटिलता उत्पन्न हुई। इसके बाद कथित रूप से एक सुधारात्मक ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद उनकी हालत में सुधार हुआ।

नूर सबा का कहना है कि जब वह बाद में अपनी शिकायत लेकर नर्सिंग होम पहुंचीं, तो जवाबदेही तय करने के बजाय उन्हें यह कहा गया कि यह घटना “अल्लाह की मर्जी” से हुई। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले को 500 से 1000 रुपये में निपटाने का सुझाव दिया गया। इसके बाद पीड़िता ने मामले की सूचना एसडीएम को दी और शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने संबंधित डॉक्टर को आरोपों पर जवाब देने के लिए तलब किया। हालांकि डॉक्टर ने सभी आरोपों से इनकार किया है। फिलहाल नूर सबा ने नर्सिंग होम और संबंधित डॉक्टर से मुआवजे की मांग की है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच जारी होने की बात कही जा रही है, जबकि अस्पताल पक्ष ने लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

गॉल ब्लैडर सर्जरी के बाद महिला द्वारा लगाए गए मेडिकल लापरवाही के आरोपों का मामला अब सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। घटना सामने आने के बाद कई यूजर्स ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल पोस्ट के बाद लोगों ने मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने आरोपित डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज करने और उनका मेडिकल लाइसेंस रद्द करने की मांग उठाई।

एक यूजर ने लिखा कि “नदीम जैसे डॉक्टर मरीजों को गुमराह कर रहे हैं और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि “यह बेहद चौंकाने वाली घटना है, ऐसे डॉक्टर का प्रैक्टिस लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द होना चाहिए।”

एक अन्य यूजर ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए लिखा कि “अगर यह सब अल्लाह की मर्जी है तो डॉक्टर पर भी कार्रवाई होना उसी मर्जी का हिस्सा है।” वहीं एक और यूजर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में डॉक्टरों को गंभीर जिम्मेदारी समझनी चाहिए और लापरवाही पर सख्त कदम उठाने चाहिए।

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