रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश डॉ. प्रेमासाई महाराज ने मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। इस दौरान दोनों के बीच विभिन्न समसामयिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

डॉ. प्रेमासाई महाराज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन, विकास एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर सकारात्मक प्रयास कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम जैसे ऐतिहासिक और जनहितकारी निर्णयों की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक अस्मिता एवं धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने डॉ. प्रेमासाई महाराज द्वारा प्रदेश में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ सेवा, सद्भाव, नैतिक चेतना तथा मानवीय मूल्यों के प्रसार के लिए किए जा रहे प्रेरणादायी कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें समाज के लिए अनुकरणीय बताया।

भेंट के दौरान डॉ. प्रेमासाई महाराज ने अपने बस्तर प्रवास के अनुभव मुख्यमंत्री के साथ साझा किए। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि कभी नक्सलवाद की चुनौतियों से प्रभावित रहा बस्तर आज विकास, शांति, सुरक्षा और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर है। शासन की जनकल्याणकारी नीतियों और सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों से क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित दिव्य दरबारों में उमड़ रही जनआस्था और बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता समाज में आध्यात्मिक चेतना एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रही है।

प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। महाराज ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास, सुशासन, सांस्कृतिक गौरव एवं जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

उन्होंने बताया कि कुनकुरी में पांच दिवसीय दिव्य दरबार का आयोजन किया जाएगा, साथ ही दो दिवसीय पदयात्रा और हिंदू जगाओ पदयात्रा भी निकाली जाएगी। इस दौरान प्रत्येक गांव में देवगुड़ी की स्थापना के साथ-साथ प्रत्येक गांव से कम से कम 10 लोगों को इस पावन धाम से जोड़ने का संकल्प लिया गया है।

इस पहल का उद्देश्य समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना, आदिवासी समाज को अपनी मूल परंपराओं और संस्कृति से जोड़ना तथा सांस्कृतिक जागरूकता का प्रसार करना बताया गया है। यह अभियान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और जनजागरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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