अमेरिका और ईरान के बीच संभावित अंतरिम शांति समझौते का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, जिसे दोनों देशों ने शुरुआती मंजूरी दे दी है। हालांकि, अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है क्योंकि महत्वपूर्ण तकनीकी और रणनीतिक बिंदुओं पर बातचीत अभी भी जारी है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम ‘डील डन’ (पूर्ण रूप से हस्ताक्षर) नहीं हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 60 दिन के सीजफायर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने पर सहमति का दावा किया है।
ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम समझौते पर सहमति बन गई है. इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है. इसी बीच होर्मुज के खुलने की चर्चा हो रही है.
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु को लेकर अंतरिम समझौता फाइनल हो गया. अब इसकी घोषणा की तैयारी की जा रही है. अमेरिका की तरफ से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान की तरफ से सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. अंतरिम समझौते में बिना टोल के होर्मुज को पूरी तरह से खोलने की बात कही गई है. होर्मुज को पूरी तरह से खुलने में कम से कम 30 दिन और ज्यादा से ज्यादा 6 महीने का वक्त लग सकता है.
सीएनएन के मुताबिक अमेरिका और ईरान ने अंतरिम समझौते को लेकर सैद्धांतिक सहमति दे दी है. इसके फाइनल ड्राफ्ट तैयार किए जा रहे हैं, जिसकी घोषणा की जाएगी. डील के तहत ईरान होर्मुज को खोलेगा और परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.
होर्मुज फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार है, जिसे 3 द्वीपों के जरिए ईरान कंट्रोल करता है. दुनियाभर में करीब 20 प्रतिशत गैस-तेल की इसी रास्ते के जरिए आपूर्ति की जाती है. जंग से पहले यह रास्ता पूरी तरह खुला था, लेकिन अमेरिकी हमले के बाद इसे ईरान ने ब्लॉक कर दिया. अब होर्मुज को पूरी तरह से खुलने में कम से कम 30 दिन और ज्यादा से ज्यादा 6 महीने का वक्त लग सकता है जिसके कई कारण है.
होर्मुज में पानी के नीचे ईरान की तरफ से 12 विध्वंसक बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं. इस रास्ते को खोलने के लिए सबसे पहले इसे हटाना होगा. ईरान का कहना है कि इसमें कम से कम 30 दिन का वक्त लग सकता है.
हाई फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री कार्ल वीनबर्ग का कहना है कि इसको लेकर तय तारीख नहीं बताई जा सकती है. क्योंकि समझौते के बाद इसे हटाने की प्रक्रिया शुरू करने में एक हफ्ते से ज्यादा का वक्त लग सकता है.
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार फारस की खाड़ी में अभी 2000 मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं. इन जहाजों को होर्मुज से निकालना आसान नहीं है. जहाजों को जब तक यह विश्वास नहीं होगा कि होर्मुज में अब कोई खतरा नहीं है, तब तक उसे बाहर नहीं निकालेंगे.
अप्रैल 2026 में अमेरिकी सांसदों के सामने होर्मुज को लेकर रक्षा मंत्रालय पेंटागन के अधिकारी पेश हुए थे. अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक इसमें पेंटागन का कहना था कि छोटे टैंकर तो जल्द निकल जाएंगे, लेकिन बड़े जहाजों को होर्मुज से निकलने में कम से कम 6 महीने का वक्त लग सकता है.
बदले में अमेरिका उस पर हमला नहीं करेगा और उसके जब्त पैसे वापस लौटाएगा. डील में लेबनान पर भी हमला न करने का उल्लेख है. यानी लेबनान का भी जंग भी अब पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.
चूंकि अभी तक किसी अंतिम और आधिकारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, इसलिए इसमें अभी थोड़ा और समय लग सकता है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

