दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप लगातार विवादों से घिरते जा रहे हैं। उनके जुड़े सरकारी वाहन का मामला थमा ही नहीं कि एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। हेमचंद विश्वविद्यालय में अर्ध कुशल दैनिक वेतनभोगी (आउटसोर्स / अंशकालीन) कर्मचारी के रूप में कार्यरत शुभांगी मराठे ने शिकायत की है कि कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप के निजी निवास पर बलपूर्वक घरेलू कार्य करवाया जाता है, तथा दबाव में कर्मचारी शुभांगी मराठे के वेतन की राशि प्रतिमाह उसके पुत्र उदय प्रताप कुलदीप के बैंक खाते में अंतरित कराया जाता है।
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मामले के गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय तिवारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति की जांच प्रतिवेदन में प्रथम दृष्टया शिकायत की पुष्टि की गई। अब इस मामले को प्रभारी कुलपति ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विधि सम्मत विवेचना एवं कार्यवाही किए जाने पुलिस उप महानिरीक्षक को 31 जुलाई को पत्र प्रेषित किया है।

शुभांगी मराठे वार्ड 47 राजीव नगर निवासी दुर्ग हेमचंद विश्वविद्यालय में अर्ध कुशल दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। उनका वेतन विश्वविद्यालय निधि से कलेक्टर दर पर वर्तमान में लगभग 11505 रुपए से 11515 प्रतिमाह रजिस्टार हेमचंद यादव यूनिवर्सिटी के कार्यालय द्वारा नेफ्ट के माध्यम से उनके यूको बैंक बचत खाता बीआईटी दुर्ग में जमा किया जाता है।
कर्मचारी शुभांगी मराठे ने कुलपति को प्रस्तुत आवेदन एवं 10 जुलाई 2026 में नोटरी सत्यापित शपथ पत्र में कहा है कि उन्हें विश्वविद्यालय के शासकीय कार्य पर नियोजित रखने के स्थान पर कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप द्वारा निजी आवास पर घरेलू कार्य खाना बनाने आदि के लिए रखा गया है तथा प्रत्येक माह वेतन जमा होने के उपरांत उन्हें मात्र लगभग 2200 रुपए ही दिए जाते हैं एवं शेष संपूर्ण राशि सेवा से हटा दिए जाने के भय और दबाव में (फोन पे / यूपीआई) के माध्यम से कुलसचिव के पुत्र उदय प्रताप कुलदीप भारतीय स्टेट बैंक के खाते में अंतरित कर ली जाती है।
दस्तावेज की अभिलेख से तथ्य पूर्णतः प्रमाणित: विश्वविद्यालय द्वारा गठित जांच समिति में संयोजक के साथ दो सदस्य बनाए गए। संयोजक के रूप में डॉ. नीलू श्रीवास्तव अधिष्ठाता छात्र कल्याण तथा सदस्य ममता अवस्थी वित्त अधिकारी तथा अश्वनी सिंह वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल थे। समिति ने अपने निष्कर्ष में अभिलिखित किया है कि शिकायतकर्ता के वेतन के खाते से वेतन जमा होने के तुरंत बाद (एक से तीन दिवस के भीतर ) उदय प्रताप कुलदीप के खाते में राशि स्थानांतरित होने का तथ्य दस्तावेज की अभिलेख से पूर्णतः प्रमाणित है तथा इसमें कोई विसंगति नहीं पाई गई। यह एक सुनियोजित आवर्ती एवं सुसंगत पैटर्न है, न कोई एकल अथवा आकस्मिक लेनदेन ।
उच्च शिक्षा विभाग को भेजेंगे जांच प्रतिवेदन : हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि महिला कर्मचारी की शिकायत के आधार पर जांच समिति गठित की गई। समिति की जांच प्रतिवेदन तथा अभिमत के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए सचिव उच्च शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्ष्य पाया गया है। इस वजह से मामले की जांच विधि सम्मत करने पुलिस विभाग को पत्र लिखा गया है।
आकस्मिक निरीक्षण में नहीं पहुंचने पर उपजेल अधीक्षक को कलेक्टर ने थमाया नोटिस
दुर्ग। जिला कलेक्टर एवं दण्डाधिकारी अभिजीत सिंह ने शनिवार को केन्द्रीय जेल दुर्ग का आकस्मिक निरीक्षण किया। जेल परिसर भ्रमण के दौरान उन्होंने कल्याण शाखा, उद्योग शाखा, जेल अस्पताल, कम्प्यूटर प्रशिक्षण/ एल.ई.डी. बल्ब उद्योग, नव निर्मित बैरक एवं अस्पताल भवन, पाकशाला, नवीन जेल, प्रिजनर कॉलिंग, एम.सी.यू. कक्ष, विडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, मुलाकात कक्ष, निर्वाह शाखा, विधि शाखा, वारंट शाखा, लेखा शाखा, सी.सी.टी.वी. कक्ष तथा महिला प्रकोष्ठ का बारीकी से अवलोकन किया।
वारंट शाखा में विचाराधीन एवं कैदी वारंटों का जायजा हुए उन्होंने विचाराधीन प्रकरणों में सुनवाई हेतु बंदियों की अधिक से अधिक पेशी वर्चुअल माध्यम से कराए जाने के निर्देश दिए। कलेक्टर सिंह ने पीड़ित पक्ष की लंबित राशि भुगतान संबंधी जानकारी शीघ्र प्राप्त कर समिति प्रस्तुत करने तथा भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जेल में नवनिर्मित भवनों (बैरक एवं निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जेल द्वारा संचालित • गौशाला का भी अवलोकन किया। इस दौरान उप जेल अधीक्षक (उद्योग) अशोक कन्नौजिया निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं मिले, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जेल में निरुद्ध पुरुष बंदी 2273 एवं महिला बंदी 134 (05 बच्चे सहित) लॉकअप में रहे। इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर सोनाल डेविड, एसडीएम दुर्ग शहर प्रफुल्ल कुमार गुप्ता एवं जेल अधीक्षक मनीष संभाकर उपस्थित रहे।
पुलिस ने 60 लाख रुपए के 200 मोबाइल लौटाए
भिलाईनगर। मोबाइल गुम हो जाए तो लोगों को लगता है कि यह अब मिलने से रहा, लेकिन दुर्ग पुलिस ने शनिवार को यह धारणा तोड़ दी। मोबाईलों को ढूंढने में दुर्ग पुलिस ने डिजिटल तकनीकी का सहारा लेकर पांच जिलों में चल रहे 60 लाख रुपए के 200 मोबाइल खोज कर उनके असली मालिकों को लौटा दिए। मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरों पर महीनों बाद मुस्कान लौट आई। यह सफलता डीआईजी व दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल के नेतृत्व में मिली ।
ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चन्द्रा ने बताया कि गुम मोबाइल की सूचना मिलने के पश्चात जिले की साइबर सेल एवं संबंधित थाना पुलिस ने प्रत्येक प्रकरण का तकनीकी विश्लेषण किया। सीईआईआर पोट्ल, तकनीकी ट्रैकिंग, विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से समन्वय तथा अन्य राज्यों एवं जिलों की पुलिस इकाइयों के सहयोग से मोबाइल फोनों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बरामद किया गया। आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत सभी मोबाइल उनके वास्तविक स्वामियों को वापस सौंपे गए।
देशभर तक अपनी खुशबू बिखेरने वाले छुईखदान के पान को मिला नया बाजार
छुईखदान। शहीद नगरी के नाम से प्रसिद्ध और कभी ‘पान की नगरी’ के रूप में देशभर में पहचान बनाने वाले छुईखदान की लगभग ढाई सौ वर्ष पुरानी पान परंपरा अब नए दौर में प्रवेश कर रही है। गौर करें कि एक समय ऐसा भी था जब यहां के पान की खुशबू बनारस सहित देश के अनेक राज्यों तक पहुंचती थी लेकिन बदलते समय के साथ यह गौरवशाली पहचान धीरे-धीरे सिमटने लगी। अब जिला प्रशासन ने इस ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक स्वरूप देकर उसे फिर से नई उड़ान देने की पहल की है।
इसी कड़ी में रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय छुईखदान परिसर में जिले की पहली पान दुकान का शुभारंभ कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने किया है। जिला प्रशासन, पान अनुसंधान केंद्र और कृषि महाविद्यालय के संयुक्त प्रयास से शुरू हुई यह पहल केवल पान की बिक्री तक सीमित नहीं है बल्कि किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का नया माध्यम बनने जा रही है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने कहा कि छुईखदान की पान खेती करीब 250 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक और कृषि विरासत है।
लंबे समय से यह पहचान कमजोर होती जा रही थी इसलिए जिला प्रशासन ने पिछले एक वर्ष से किसानों के साथ मिलकर इसे पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया। किसानों गुणवत्तापूर्ण पौधे, आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इस वर्ष कई किसानों ने दोबारा पान की खेती प्रारंभ की है। श्री चंद्रवाल ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है बल्कि बेहतर विपणन व्यवस्था भी आवश्यक है।
दुकान में मिलेगी पान की अलग-अलग वैरायटी दुकान में पान चॉकलेट, पान अप्पे, पान चीला, पान सैंडविच, पान पाउडर, पान रिफ्रेश और पान लड्डू जैसे आकर्षक मूल्यवर्धित उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। दुकान का संचालन सोमवार से शनिवार तक सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक किया जाएगा।
कार्यक्रम में समाजसेवी नवनीत जैन, भावेश कोचर, राजीव जंघेल, रोशन चंद्राकर, संदीप महोबिया, दीपक देशमुख, संजय शर्मा, डॉ. विनय गिरपुंजे, पन्ना मंडावी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, वैज्ञानिक, कृषि महाविद्यालय के प्राध्यापक, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं, किसान एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
कोर्ट के एक फैसले से मिली किसानों की हड़पी हुई जमीन
राजनांदगांव। रसूखदारों के चंगुल में फंसे दर्जनभर से अधिक किसानों को आखिर न्याय मिलने की शुरूआत हो गई है। पिछले पन्द्रह साल से 94 पेशियों के दंश झेल रहे किसानों को अब न्यास की आस जागी है। हाल ही में एसडीएम कोर्ट से एक किसान को जमीन वापस करने का फैसला सुनाया गया है।
जानकारी के अनुसार, डोंगरगांव एसडीएम अनिकेत साहू ने रसूखदार द्वारा धोखे से हड़पी जमीन की रजिस्ट्री को गलत करार देते हुए रजिस्ट्री को शून्य कर दिया है। इस मसले में किसान को करीबन 15 साल बाद न्याय मिला है। बताया गया कि, वर्ष 2008-09 में डोंगरगांव क्षेत्र के लगभग दर्जनभर किसानों ने ब्याज पर रकम लिया था। जिसके बाद रुपए की अदायगी भी कर दी।
इस दौरान सूदखोरों ने फर्जी तरीके से वर्ष 2011 में धोखाधड़ी करते हुए किसानों की जमीन रजिस्ट्री करा ली। किसानों को जब इसकी जानकारी मिली तो किसानों ने न्यायालय की शरण ली। पेशी जाते-जाते कुछ किसानों के पिता का स्वर्गवास भी हो गया। वर्ष 2014 में इसकी शिकायत तहसील स्तर पर की गई। इसके बाद मामला एसडीएम न्यायालय और फिर जिला कलेक्टर तक पहुंचा।
इसके बाद लगभग 2 वर्ष तक सिविल न्यायालय में मामला चला और वर्ष 2023 में वापस डोंगरगांव राजस्व न्यायालय में प्रकरण भेजा गया। इस प्रकरण में न्याय मिलने की शुरूआत डोंगरगांव एसडीएम न्यायालय से फैसला देते हुए कुमरदा तहसील क्षेत्र के काम बंशी बंजारी स्थित वाद भूमि खसरा नंबर 53 एवं 507/1 को लेकर 19 अप्रैल वर्ष 2011 को की गई रजिस्ट्री शून्य घोषित कर दिया गया है। वहीं उक्त आदेश में संबंधित हल्का पटवारी को उक्त वाद भूमि स्व तोरण लाल नांदेश्वर के वारिसानों के नाम पर पुनः राजस्व अभिलेख दुरूस्त करने निर्देशित किया गया है।
साहूकारी लाइसेंस का पालन नहीं
तहसीलों से साहूकारी लाइसेंस अधिकृत रूप से जारी किया जाता है। जिसमें निश्चित निश्चित प्रतिशत ही ब्याज वसूलने की पात्रता है। लेकिन यहां रसूखदारों द्वारा बीस फीसदी तक ब्याज की वसूली की जा रही हैं, जो नियम विरूध्द है। हाल ही में राजनांदगांव में कोठारी बंधुओं की जांच भी इसी मामले से जुड़ी है। जहां जमीन हड़पने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया हैं।
‘लॉन्ग एशिया ट्रेडिंग ऐप’ की शिकायत पर जांच नहीं बढ़ी आगे
डोंगरगढ़। इधर निवेशकों को फिर 25 प्रतिशत रिटर्न और ऐप शुरू होने लॉन्ग एशिया ट्रेडिंग ऐप से जुड़े कथित का भरोसा दिलाया जा रहा निवेश घोटाले में डोंगरगढ़ थाना में सामूहिक शिकायत दर्ज होने के सात दिन बाद भी जांच में कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही है। 90 से अधिक निवेशकों ने अपने हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर के साथ आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की अब थी, लेकिन तक न तो शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज हुए हैं और न ही किसी प्रकार की सार्वजनिक कार्रवाई सामने आई है। इससे निवेशकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
वही मामला सामने आने के बाद ईकवरेज के स्थानीय मीडिया में लगातार बीच अब निवेशकों की ओर से नए दावे भी सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि पहले लोगों को शांत रहने की सलाह देने वाले अब नए आश्वासन दे रहे हैं। निवेशकों के मुताबिक नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग यह शाम संदेश दे रहे हैं कि रविवार 4 बजे के बाद ऐप दोबारा शुरू होगा और अगस्त महीने में निवेशकों को 25 प्रतिशत राशि लौटाई जाएगी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा की गई है।
इसी बीच कंपनी का एक आंतरिक प्रश्न- उत्तर दस्तावेज भी सामने आया है। इसमें कंपनी ने भारत में लिक्विडिटी (नकदी उपलब्धता) की समस्या स्वीकार करते हुए निकासी संकट के समाधान के रूप में USDTpro नाम के डिजिटल टोकन को शुरू करने की बात कही है। दस्तावेज में दावा किया गया है कि भारत में बैंकिंग और नियामकीय चुनौतियों के कारण निकासी प्रभावित हुई और भविष्य में P2P एक्सचेंज, मनी चेंजर नेटवर्क तथा सोशल ट्रेडिंग जैसी सुविधाएं शुरू की जाएंगी। हालांकि इन दावों के समर्थन में किसी नियामक संस्था का सत्यापन या स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूरे नेटवर्क में अधिकांश निवेश बैंकिंग प्रणाली के बजाय नकद (कैश) के माध्यम से कराया गया। उनका कहना है कि स्थानीय ब्रोकर निवेशकों से नकद राशि लेकर उसे ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर डॉलर के रूप में निवेश दिखाते थे । यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो मामला केवल निवेश धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय नियमों के उल्लंघन का विषय भी बन सकता है।
पुलिस बोली- पहले साक्ष्य और बयान जरूरी इन सब के बिच मामले में एसडीओपी केसरी नंदन नायक ने कहा कि अभी तक शिकायतकर्ताओं के विस्तृत बयान दर्ज नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि केवल आवेदन के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं मिलने पहुंचा जा सकता। शिकायतकर्ताओं को अपने आरोपों के समर्थन में लेनदेन का रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। उन्हीं के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। फिलहाल किसी व्यक्ति की भूमिका या कार्रवाई को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
किसान 14 अगस्त तक करा सकेंगे खरीफ फसलों का बीमा
राजनांदगांव। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत खरीफ वर्ष 2026 में किसान अपने फसलों का बीमा 14 अगस्त तक करा सकते हैं। पूर्व में यह तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई थी, जिसमें बढ़ोत्तरी की गई है।
जिले के ऋणी एवं अऋणी दोनों श्रेणी के किसान निर्धारित तिथि तक अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा कराकर प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। उप संचालक कृषि टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए फसल बीमा किसानों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करता है।
सूखा, बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने की स्थिति में योजना के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। जिले में धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, अरहर, उड़द, मूंग, कोदो, कुटकी तथा रागी जैसी अधिसूचित खरीफ फसलों का बीमा कराया जा सकता है। योजना का लाभ भू-धारक एवं बटाईदार किसान दोनों ले सकते हैं।
खरीफ 2026 के लिए किसानों द्वारा देय प्रीमियम राशि निर्धारित की गई है। जिसके तहत धान (सिंचित) 1320 रूपए, धान (असिंचित) 990 रूपए, मक्का 1056 रूपए, सोयाबीन 1100 रूपए, मूंगफली 924 रूपए, अरहर 880 रूपए, उड़द 660 रूपए, मूंग 638 रूपए, कोदो 484 रूपए, कुटकी 484 रूपए, रागी 550 रूपए देय प्रीमियम राशि निर्धारित की गई है।
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