Automobile Desk: आजकल सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तादाद लगातार बढ़ रही है। लोग इन्हें इनके पर्यावरण अनुकूल स्वभाव और कम रनिंग कॉस्ट की वजह से पसंद कर रहे हैं। हालांकि, ईवी खरीदते वक्त हर ग्राहक के मन में बैटरी और उसकी रेंज को लेकर एक चिंता जरूर बनी रहती है। इसी चिंता को दूर करने और गाड़ी की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए वाहन निर्माता कंपनियां इसमें कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। इन्हीं में से एक बेहद कारगर तकनीक है ‘रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम’ ( ‘Regenerative braking system’ )।

साधारण शब्दों में समझें तो यह एक ऐसी प्रणाली है जो गाड़ी के चलने के दौरान बर्बाद होने वाली ऊर्जा को फिर से इस्तेमाल में ले आती है। जब भी आप सड़क पर गाड़ी चलाते हुए स्पीड कम करते हैं या ब्रेक लगाते हैं, तो गाड़ी की बची हुई गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) को यह सिस्टम बिजली में बदलकर वापस बैटरी में स्टोर कर देता है।

परंपरागत पेट्रोल या डीजल गाड़ियों में जब ब्रेक लगाया जाता है, तो ब्रेक पैड्स और पहियों के बीच घर्षण (फ्रिक्शन) पैदा होता है। इस प्रक्रिया में गाड़ी की गति तो धीमी हो जाती है, लेकिन उससे पैदा होने वाली ऊर्जा गर्मी के रूप में हवा में बेकार चली जाती है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग इसी बर्बादी को रोकती है।

जब ड्राइवर एक्सेलेरेटर से पैर हटाता है या हल्का ब्रेक दबाता है, तो ईवी में लगी इलेक्ट्रिक मोटर का काम उल्टा हो जाता है। वह गाड़ी को आगे खींचने के बजाय एक जनरेटर की तरह काम करने लगती है। पहियों के घूमने से मोटर घूमती है और बिजली पैदा होती है, जिसे सीधी बैटरी तक पहुंचा दिया जाता है।

शहरी इलाकों या भारी ट्रैफिक में यह फीचर सबसे ज्यादा उपयोगी साबित होता है। शहरों में रेड लाइट, जाम या मोड़ के कारण बार-बार गाड़ी को धीमा करना या रोकना पड़ता है। हर बार ब्रेक लगाने पर यह सिस्टम थोड़ी-थोड़ी ऊर्जा बचाकर बैटरी में वापस भेजता रहता है। इससे न केवल बैटरी की एफिशिएंसी बेहतर होती है, बल्कि गाड़ी की ओवरऑल ड्राइविंग रेंज भी बढ़ जाती है।

कई आधुनिक इलेक्ट्रिक गाड़ियों में ‘वन-पैडल ड्राइविंग’ ( ‘One-paddle driving ) का विकल्प भी मिलता है। इसमें ड्राइवर को बार-बार ब्रेक पैडल दबाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। जैसे ही आप एक्सेलेरेटर से पैर हटाते हैं, रीजेनरेटिव सिस्टम (Regenerative System) अपने आप गाड़ी को धीमा करना शुरू कर देता है। इससे ड्राइविंग काफी आसान हो जाती है।

इस तकनीक का एक बड़ा व्यावहारिक फायदा यह भी है कि इससे मैकेनिकल ब्रेक पैड्स पर दबाव बहुत कम पड़ता है। चूंकि मोटर ही गाड़ी को धीमा करने का काफी काम कर देती है, इसलिए पारंपरिक ब्रेक पैड कम घिसते हैं। इससे गाड़ी के रखरखाव (मेंटेनेंस) का खर्च घटता है और ब्रेक पार्ट्स की लाइफ लंबी हो जाती है।

वाहन विशेषज्ञों और ड्राइविंग स्थितियों के अनुसार, यह सिस्टम लगभग 10 से 30 प्रतिशत तक ऊर्जा को दोबारा हासिल करने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के रास्ते पर गाड़ी चला रहे हैं और आपकी ड्राइविंग शैली कैसी है। ढलान पर उतरते समय या ट्रैफिक में यह सबसे ज्यादा असरदार होता है।

ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि अगर बैटरी पहले से 100 प्रतिशत चार्ज है या बहुत ज्यादा ठंडी है, तो यह सिस्टम सीमित रूप से काम करता है। ऐसी स्थिति में गाड़ी को रोकने के लिए सामान्य मैकेनिकल ब्रेक का ही सहारा लिया जाता है। इसके अलावा, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सपोर्टिव फीचर है, यानी यह बैटरी की लाइफ और रेंज बढ़ाता जरूर है, लेकिन यह एक्सटर्नल चार्जर का विकल्प नहीं हो सकता। गाड़ी को पूरा चार्ज करने के लिए प्लग-इन चार्जिंग की आवश्यकता बनी रहती है।

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