अजय सैनी, भिवानी. हरियाणा सरकार द्वारा ट्रांसमिशन लाइनों हेतु राइट ऑफ वे मुआवजे से संबंधित 29 अप्रैल 2026 को जारी की गई नई अधिसूचना के खिलाफ प्रदेश के किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्राम स्वराज किसान मोर्चा व भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा के बैनर तले भिवानी में सोमवार को किसानों ने इस नीति को पूरी तरह से किसान-विरोधी, असंवैधानिक और कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाली व्यवस्था करार दिया है। किसानों ने इस संबंध में शहर में प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई और नीति को वापस लेने की मांग की है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ग्राम स्वराज किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जोगेंद्र तालु ने कहा कि हरियाणा सरकार की 29 अप्रैल 2026 की अधिसूचना पूरी तरह से मनमानी, अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक है। यह नीति किसानों के अधिकारों, हितों और उनकी सहभागिता को पूरी तरह कुचलने का काम कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने यह नीति केवल पावरग्रिड, एचवीपीएनएल और निजी ट्रांसमिशन कंपनियों को नाजायज लाभ पहुंचाने के लिए बनाई है।
उन्होंने कहा कि इस नई नीति में संदर्भ बाजार दर निर्धारित करने के लिए जो व्यवस्था की गई है, वह पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और भेदभाव से भरी है। मार्केट रेट कमेटी की कार्रवाई में से भूमि स्वामियों की सार्थक भागीदारी को लगभग समाप्त कर दिया गया है। एमआरसी में किसानों की भूमिका को केवल एक औपचारिकता मात्र बनाकर छोड़ दिया गया है। अगर सरकार ने इस विवादित अधिसूचना को तत्काल वापस नहीं लिया और किसानों के अधिकारों की रक्षा नहीं की, तो हरियाणा के प्रभावित भूमि स्वामी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस शांतिपूर्ण आंदोलन को और अधिक उग्र व तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
तालु ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से मांग है कि हरियाणा सरकार की 29 अप्रैल 2026 की विवादित अधिसूचना को तत्काल रद्द किया जाए। 21 मार्च 2025 की पूर्व किसान-हितैषी नीति को पुन: लागू किया जाए। मार्केट रेट कमेटी की कार्रवाई में प्रभावित किसानों की निष्पक्ष एवं प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो। मुआवजे का निर्धारण वास्तविक प्रचलित बाजार मूल्य एवं भविष्य की विकास संभावनाओं के आधार पर किया जाए। समान परिस्थितियों वाली परियोजनाओं हेतु सभी जिलों में एक समान मुआवजा नीति लागू की जाए।

किसानों को बाजार दरों के मनमाने दमन से संरक्षण प्रदान किया जाए। प्रभावित किसानों एवं स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक स्वतंत्र समीक्षा समिति का गठन किया जाए। 14 मई 2026 को तोशाम प्रकरण वाले रेटों को वापस लिया जाए, जो स्थापित पॉलिसी के खिलाफ हैं। 6 मई 026 को एसडीएम तोशाम द्वारा फाइनल किए गए रेटों को ही लागू किया जाए, जिससे किसानों को वास्तविक इंसाफ मिल सके।
इस अवसर पर रामेहर बागनवाला, जंगबीर सिंह अलखपुरा, रमेश कुमार, अतर सिंह, नरेश कुमार, रमेशचंद्र, हरिराम, विजय, सोमबीर, श्याम सुंदर, ईश्वर सिंह बागनवाला, धर्म सिंह, रघुबीर सिंह, विरेंद्र कुमार, मनोज, सत्यवान, जयवीन, पवन, अमरजीत, प्रेम, अनिल कुमार, रोहताश कुमार, भाग सिंह, हरिकिशन सहित अनेक किसान मौजूद रहे।
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