फतेहाबाद की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी।

फतेहाबाद। एक नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस घिनौने अपराध के दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सख्त सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित गर्ग की अदालत ने आरोपित विक्रम उर्फ रोकी को सभी साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार देते हुए यह कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपित ने मासूम की जिंदगी तबाह करने से पहले एक पल भी नहीं सोचा।

इस संवेदनशील मामले में माननीय अदालत ने आरोपी को अलग-अलग धाराओं के तहत कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने आईपीसी की धारा 363 के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना और धारा 366 के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। इसके अलावा, पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 6 पॉक्सो एक्ट के तहत भी 20 वर्ष कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। अदालत ने जुर्माने की कुल राशि में से एक लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने के निर्देश दिए।

फतेहाबाद के जिला न्यायवादी देवेंद्र मित्तल ने पूरे मामले की कानूनी जानकारी देते हुए बताया कि 28 जून 2024 को थाना सदर फतेहाबाद में यह शिकायत दर्ज करवाई गई थी। पीड़ित परिवार के शिकायतकर्ता ने स्थानीय पुलिस को बताया था कि उसकी नाबालिग पुत्री अचानक घर से लापता हो गई है। उन्हें किसी अज्ञात युवक द्वारा उसे बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का गहरा संदेह है। परिजनों से मिली इस प्राथमिक लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत अपहरण की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी थी।

गहन जांच के दौरान स्थानीय पुलिस की टीम ने 31 जुलाई 2024 को मुस्तैदी दिखाते हुए लापता नाबालिग बालिका को राजस्थान से सकुशल बरामद कर लिया। मामले की आगे की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच में मुख्य आरोपित विक्रम उर्फ रोकी की सीधी संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट, अदालत में दर्ज पीड़िता के बयान और अन्य पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत भौतिक साक्ष्य पेश किए, जिससे यह सजा मुमकिन हो सकी।