Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर मंगलवार को बड़ी जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस विधेयक को विस्तृत जांच और विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज सकती है। हालांकि, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

FCRA Bill को लेकर सरकार का क्या रुख?

सूत्रों के अनुसार, सरकार FCRA बिल के प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा के लिए इसे JPC को भेजने पर विचार कर रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी दलों ने विधेयक के कई प्रावधानों को लेकर सवाल उठाए हैं।

FCRA Amendment Bill 2026 को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। हालांकि, मंगलवार तक इसे लोकसभा की कार्यसूची में विचार और पारित करने के लिए शामिल नहीं किया गया था। इससे 12 अगस्त को बिल पर संभावित चर्चा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

12 अगस्त को संसद में होगी चर्चा?

हाल ही में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कहा था कि FCRA बिल पर 12 अगस्त को संसद में चर्चा और मंजूरी के लिए इसे लाया जा सकता है।

लालदुहोमा के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने बिल को लेकर अपनी चिंताएं गृह मंत्री के सामने रखीं। उन्होंने दावा किया कि शाह ने भरोसा दिलाया है कि प्रस्तावित कानून पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। अब सरकार द्वारा बिल को JPC के पास भेजे जाने की संभावित खबर के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि 12 अगस्त को FCRA Bill पर संसद में चर्चा होगी या नहीं।

क्या है FCRA Amendment Bill का मकसद?

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विदेशी योगदान और उससे जुड़ी संपत्तियों की निगरानी, प्रबंधन और निपटान के लिए एक व्यापक व्यवस्था तैयार करना है। इसके तहत एक निर्धारित अथॉरिटी को उन संगठनों की संपत्तियों पर नियंत्रण और प्रबंधन से जुड़ी शक्तियां मिल सकती हैं, जिनका FCRA लाइसेंस रद्द हो चुका है।

विदेशी फंडिंग को लेकर यह विधेयक पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। हाल ही में विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की टिप्पणियों पर कहा था कि FCRA Bill भारत का आंतरिक मामला है और इस पर फैसला संसद करेगी।

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