राजकुमार दुबे, भानुप्रतापपुर। कांकेर जिले के कोरर थाना में आज एक भावुक और सांस्कृतिक दृश्य देखने को मिला। यहां थाना प्रभारी के बिलासपुर तबादले के बाद विदाई के दौरान बस्तर की पारंपरिक “डोर छेकना” रस्म निभाई गई। इस अनोखी परंपरा ने विदाई के माहौल को यादगार बना दिया।
बता दें कि कोरर थाना प्रभारी जीतेन्द्र गुप्ता का हाल ही में बिलासपुर तबादला हुआ है। आज जब वे थाना परिसर से अपने नए पदस्थापन स्थल के लिए रवाना हो रहे थे, तभी थाना की महिला कर्मचारियों ने बस्तर की प्रसिद्ध “डोर छेकना” परंपरा का निर्वहन करते हुए उनका रास्ता रोक लिया।


थाना प्रभारी ने हंसी-खुशी महिला कर्मचारियों को भेंट स्वरूप राशि प्रदान की, जिसके बाद रास्ता खोला गया और उन्हें शुभकामनाओं के साथ विदाई दी गई। इस दौरान थाना परिसर में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस भावुक पल को देखा। विदाई के साथ-साथ बस्तर की लोक परंपरा का यह सुंदर दृश्य सभी के लिए यादगार बन गया।
कहते हैं कि बस्तर की पहचान केवल उसके जंगल, झरने और जनजातीय संस्कृति से ही नहीं, बल्कि ऐसी आत्मीय परंपराओं से भी है, जो रिश्तों में अपनापन और सम्मान का भाव जीवित रखती हैं। कोरर थाना में डोर छेकने की यह रस्म उसी सांस्कृतिक विरासत की एक खूबसूरत झलक बनकर सामने आई।
जानिए क्या है डोर छेकना परंपरा
बस्तर अंचल में डोर छेकना अपनत्व, सम्मान और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। किसी अतिथि, दामाद या सम्मानित व्यक्ति की विदाई के समय ग्रामीण और परिजन प्रतीकात्मक रूप से रास्ता रोककर नेग मांगते हैं। नेग या भेंट मिलने के बाद ही रास्ता खोला जाता है। यह परंपरा वर्षों से बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है। इसी परंपरा को जीवंत करते हुए महिला कर्मचारियों ने थाना प्रभारी की गाड़ी के सामने डोर लगाकर उन्हें रोक लिया।
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