ODISHA DESK, बारीपदा: सिमिलिपाल अभयारण्य क्षेत्र से बीते 1 जून को बरामद आंशिक मानव कंकाल और शव के टुकड़ों की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। लैब टेस्ट से यह साफ हो गया है कि उक्त व्यक्ति एक तेंदुए (कलरपतरिया बाघ) के हमले का शिकार हुआ था। सिमिलिपाल टाइगर प्रोजेक्ट के इतिहास में तेंदुए के हमले से किसी इंसान की मौत होने का यह पहला आधिकारिक मामला है।

मृतक की पहचान जशीपुर थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव के रहने वाले साधु नायक के रूप में हुई है। ग्रामीणों ने कुमुदाबाड़ी के पास एक जंगली झाड़ी के भीतर उनका क्षत-विक्षत और आधा खाया हुआ शव देखा था। इसके बाद वन विभाग और पुलिस कर्मियों द्वारा काफी खोजबीन किए जाने के बावजूद शरीर के बाकी हिस्से नहीं मिल पाए थे।

शुरुआती जांच के दौरान घटनास्थल से मौत के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला था, लेकिन बाद में वैज्ञानिक और लैब परीक्षणों से तेंदुए के हमले के पुख्ता सबूत मिले हैं। मृतक के शरीर से मिले जानवर के बालों का डीएनए तेंदुए से मेल खा गया है, वहीं शरीर पर मिले दांतों के निशान तेंदुए के कैनाइन पंचर (दांतों के घाव) के आकार और पैटर्न के समान पाए गए हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला अचानक या महज एक दुर्घटना हो सकता है। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद सिमिलिपाल प्राधिकरण ने जंगल से सटे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी है। तेंदुए की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए एआई (AI) सक्षम कैमरे और कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।

जंगलों के भीतर वन विभाग की पेट्रोलिंग स्क्वाड (गश्ती दल) को तैनात किया गया है। ग्रामीणों को सुबह-सुबह या शाम के वक्त अकेले जंगल में न जाने और समूहों में बाहर निकलने की सलाह दी गई है। यदि कोई वन्यजीव दिखाई देता है, तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी वन विभाग के कैंप को देने का अनुरोध किया गया है। औपचारिक जांच प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वन विभाग ने इस विस्तृत लैब रिपोर्ट को पुलिस प्रशासन के पास भेज दिया है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m