केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन एवं वादन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को निर्देश भेजते हुए उन अवसरों की विस्तृत सूची जारी की है, जिन पर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का गायन या वादन किया जाना चाहिए।

किन कार्यक्रमों में गाया या बजाया जाएगा राष्ट्रगीत?

9 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार, ‘वंदे मातरम’ नागरिक सम्मान समारोहों, राष्ट्रपति के औपचारिक राजकीय कार्यक्रमों तथा सरकार द्वारा आयोजित अन्य आधिकारिक आयोजनों में राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान के समय गाया या बजाया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रपति के ऑल इंडिया रेडियो (AIR) और टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले और बाद में भी राष्ट्रगीत का वादन होगा।

राज्यपाल और उप-राज्यपाल के अपने-अपने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित औपचारिक राजकीय कार्यक्रमों में आगमन और प्रस्थान के दौरान भी राष्ट्रगीत बजाया जाएगा। परेड के दौरान राष्ट्रीय ध्वज लाए जाने के समय भी इसका वादन किया जाएगा।

सही शब्द और उच्चारण का पालन अनिवार्य

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के गायन या वादन के दौरान उनके सही शब्दों और उच्चारण का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इसके लिए शब्दावली और उच्चारण गाइड भी उपलब्ध कराई है।

गाइडलाइन में कहा गया है कि जिन राज्यों में राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के साथ राज्य गीत भी गाया जाता है, वहां पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा।

‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष पहल

केंद्र सरकार इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मना रही है। उल्लेखनीय है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘जन गण मन’ को भारत का राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ को समान सम्मान प्राप्त राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था। स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए दोनों को राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक के रूप में मान्यता प्राप्त है।

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