हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर में चर्चाओं का केंद्र बने कथित हनी ट्रैप और शराब कारोबारी से ब्लैकमेलिंग मामले की जांच अभी भी कई सवालों के जवाब तलाश रही है। सात आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद भी पुलिस की पड़ताल थमी नहीं है। वहीं दो अन्य आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। इस बीच सोशल मीडिया पर मामले को लेकर तरह-तरह की कहानियां और दावे सामने आ रहे हैं लेकिन पुलिस फिलहाल किसी भी दावे की पुष्टि करने से बच रही है।
मोबाइल और डिजिटल सबूतों में छिपे हैं कई राज
क्राइम ब्रांच के मुताबिक आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन डिवाइसों से कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों के बीच किस तरह की बातचीत हुई, क्या किसी प्रकार की वीडियो रिकॉर्डिंग बनाई गई? और क्या किसी सुनियोजित तरीके से ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था?
श्वेता जैन का पुराना रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल श्वेता जैन के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। जांच में यह सामने आया है कि उसका नाम पहले भी इसी तरह के विवादित मामलों से जुड़ चुका है। इसी वजह से पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इस पूरे मामले में भी वीडियो बनाकर दबाव बनाने या रकम वसूलने की रणनीति अपनाई गई थी।
दावे बहुत लेकिन सबूत अभी नहीं
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कहीं सेक्स वर्करों के जरिए वीडियो बनवाने की बात कही जा रही है तो कहीं 32 जीबी की कथित पेनड्राइव मिलने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस का साफ कहना है कि अभी तक जांच में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है जिससे इन चर्चित दावों की पुष्टि की जा सके।
हनी ट्रैप या ब्लैकमेलिंग? पुलिस दोनों एंगल से कर रही जांच
जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले को सिर्फ हनी ट्रैप तक सीमित नहीं मान रही हैं। पुलिस ब्लैकमेलिंग, उगाही और संगठित साजिश के पहलुओं को भी गंभीरता से जांच रही है। अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर इस पूरे मामले की असली कहानी क्या है और वायरल हो रही चर्चाओं में कितनी सच्चाई है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद हो सकते हैं बड़े खुलासे
क्राइम ब्रांच का मानना है कि डिजिटल सबूतों की जांच इस केस की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों की भूमिका, उनके आपसी संबंध और कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं। फिलहाल पुलिस हर पहलू को जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है और जल्द ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

