प्रदीप मालवीय, उज्जैन। तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के नाम पर सोशल मीडिया के जरिए संरक्षित वन्यजीवों के अवशेष बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। जिला वन अधिकारी (DFO) अनुराग तिवारी ने बताया कि वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो भोपाल से मिली सूचना के आधार पर वन विभाग ने जांच शुरू की। सूचना एक महिला द्वारा संचालित इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़ी थी, जहां वन्यजीवों के अंगों को बेचने की कोशिश की जा रही थी।
वन विभाग ने किया भंडाफोड़
DFO अनुराग तिवारी ने बताया कि जांच के दौरान वन विभाग की टीम ने ग्राहक बनकर महिला से संपर्क करने का प्रयास किया। इंस्टाग्राम पोस्ट में बार-बार उज्जैन का नाम इस्तेमाल किया जा रहा था, इसलिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि उसका शहर से कोई संबंध है या नहीं।

हालांकि जांच में महिला का उज्जैन से कोई सीधा कनेक्शन नहीं मिला। बैंक खातों की KYC जांच में महिला का पता दिल्ली का सामने आया। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी और दस्तावेज वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरों, भोपाल को भेज दिए गए हैं, जहां से आगे की जांच दिल्ली में की जाएगी।
3-4 करोड़ के लेनदेन का खुलासा
DFO ने जानकारी दी कि जांच के दौरान महिला के बैंक खाते में पिछले छह महीनों में करीब 3-4 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। यह रकम छोट-छोटे ट्रांजैक्शनों के जरिए जमा हुई थी, जिससे बड़े स्तर पर कारोबार होने की आशंका जताई जा रही है।

तंत्र-मंत्र का दावा कर बेचा जा रहा सामान
शुरूआती जांच में यह जानकारी सामने आई है कि महिला लोगों को यह कहकर वन्यजीवों के अवशेष बेचती थी कि इन्हें रखने या इस्तेमाल करने से आर्थिक लाभ होगा, तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त होंगी और जीवन की कई समस्याएं दूर हो जाएंगी। इसी तरह के भ्रामक दावों और अंधविश्वास का सहारा लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा था। वहीं वन विभाग का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और उसी के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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