गया। नगर निगम का एक शर्मनाक चेहरा सामने आया है। यहां एक ठेकेदार ने निगम अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि जब उसने पिछले 7 महीनों से लंबित अपने भुगतान की मांग की, तो अधिकारियों ने गुस्से में आकर उसके घर के मुख्य द्वार पर कूड़े का ढेर फिंकवा दिया। इस घटना के बाद शहर के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

​7 महीने से लंबित था भुगतान

​कुजापी मोहल्ले के निवासी ठेकेदार अनिल भूषण लंबे समय से नगर निगम में नल-जल योजना, प्याऊ और चापाकल मरम्मत का कार्य देख रहे हैं। अनिल के अनुसार, उनका पिछले सात महीनों का भुगतान बकाया है। उन्होंने कई बार लिखित और मौखिक रूप से अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासनों से ही संतोष करना पड़ा।

​विरोध करने पर आधी रात को ‘कूड़ा कांड’

​मामला तब बिगड़ा जब बुधवार को निगम के अधिकारी अनिल के घर काम का दबाव बनाने पहुंचे। जब अनिल ने पुराने बकाये के बिना काम करने में असमर्थता जताई, तो कथित तौर पर बुधवार रात करीब 10:20 बजे नगर निगम के एक ट्रैक्टर ने उनके घर के गेट पर भारी मात्रा में कूड़ा डाल दिया। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें ट्रैक्टर को कूड़ा गिराते हुए साफ देखा जा सकता है।

​बीमार मां को अस्पताल ले जाने में हुई देरी

​इस अमानवीय कृत्य का खामियाजा ठेकेदार के परिवार को भुगतना पड़ा। कूड़े के कारण घर का रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया। अनिल भूषण ने बताया कि उनकी मां मधु देवी बीमार थीं और उन्हें इलाज के लिए पटना ले जाना था। रास्ता बंद होने के कारण उन्हें समय पर अस्पताल नहीं ले जाया जा सका, जिससे परिवार को भारी मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा।

​अधिकारियों पर सीधे आरोप और जांच शुरू

​ठेकेदार ने इस पूरी घटना के लिए नगर निगम के सिटी मैनेजर और जल पर्षद के कार्यपालक अभियंता राकेश कुमार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यह सब अधिकारियों के इशारे पर हुआ है। दूसरी ओर, नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने कहा कि उन्हें कूड़ा फेंकने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि ठेकेदार के खिलाफ कुछ शिकायतें मिली थीं, लेकिन घर के आगे कूड़ा फेंकना गलत है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।