गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि हरियाणा के करीब 82 फीसदी छात्र अपनी पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए जनरेटिव एआई का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तकनीक के उपयोग से विद्यार्थियों की रचनात्मकता और असाइनमेंट की गुणवत्ता में काफी सुधार दर्ज किया गया है।
चंडीगढ़। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक तेजी से विद्यार्थियों के सीखने और समझने के पारंपरिक तरीकों को बदल रही है। हरियाणा के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के कुल 400 स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों पर किए गए एक ताजा वैज्ञानिक अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि करीब 82 प्रतिशत विद्यार्थी अपनी दैनिक पढ़ाई में जनरेटिव एआई टूल्स का नियमित उपयोग कर रहे हैं। इन छात्रों में से 74 प्रतिशत विद्यार्थियों का स्पष्ट मानना है कि एआई की मदद से उनके कॉलेज असाइनमेंट और प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पहले से बहुत अधिक बेहतर हुई है।
युवाओं पर किया विशेष सर्वे
इस विशेष अध्ययन में शामिल 51 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों ने यह भी स्वीकार किया कि इस तकनीक से उनकी कार्यक्षमता और आलोचनात्मक सोच में काफी रचनात्मक सुधार हुआ है। यह महत्वपूर्ण जानकारी गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस के होनहार शोधार्थी अनमोल खुराना के शोध में प्रमुखता से सामने आई है। उनका यह शोधपत्र भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जम्मू के आगामी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चुना गया है। एमबीए विभाग के निदेशक प्रो। डॉ। संजीव कुमार के कुशल निर्देशन में किया गया यह सर्वे मुख्य रूप से दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच पूरा किया गया था।
चैटजीपीटी छात्रों की पहली पसंद
इस शोध सर्वे में शामिल कुल प्रतिभागियों में 68 प्रतिशत स्नातक और 32 प्रतिशत स्नातकोत्तर विद्यार्थी थे, जिनमें 58.6 प्रतिशत पुरुष और 41.4 प्रतिशत महिलाएं शामिल रहीं। अधिकांश विद्यार्थी 18 से 25 वर्ष के आयु वर्ग के थे, जिससे युवाओं में एआई के बढ़ते प्रभाव की स्पष्ट तस्वीर दिखती है। अध्ययन के अनुसार सबसे अधिक 85 प्रतिशत विद्यार्थी चैटजीपीटी का उपयोग करते हैं, जिसके बाद 39.4 प्रतिशत गूगल जेमिनी और 13.5 प्रतिशत परप्लेक्सिटी का नंबर आता है। इसके अलावा करीब 58.9 प्रतिशत विद्यार्थियों को जनरेटिव एआई की पहली तकनीकी जानकारी उनके अपने शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से ही प्राप्त हुई थी।
मौलिक लेखन क्षमता पर असर
शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि जनरेटिव एआई का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग विद्यार्थियों की सीखने की दक्षता, रचनात्मकता, नवाचार और समस्या-समाधान क्षमता को काफी बढ़ा रहा है। जो विद्यार्थी मानसिक रूप से अधिक आत्मविश्वासी हैं, वे एआई का अधिक प्रभावी उपयोग करते हैं। हालांकि अध्ययन में इस बात को लेकर भी विशेष रूप से चेताया गया है कि उचित दिशा-निर्देशों के बिना एआई पर बहुत अधिक निर्भरता विद्यार्थियों की मौलिक लेखन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। अनमोल खुराना ने बताया कि आईआईएम जम्मू के सम्मेलन में देश-विदेश के शीर्ष शिक्षाविद् इस तकनीक की भविष्य की भूमिका और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

