सक्ती। कुछ पव्वा शराब को जब्त कर या फिर छोटी मोटी चोरियों का खुलासा कर वाहवाही लूटने वाले सक्ती पुलिस का एक घिनौना चेहरा सामने आया है। अगर बात किसी रसूखदार पर कार्रवाई करने की आए तो थाना प्रभारी के हाथों में मेहंदी लग जाती है। ऐसे कई उदाहरण है, जो लगभग पिछले आठ महीने से सक्ती थाने में देखने को मिल रहा है।
ये सब ऐसे मामले हैं, जिसमें थाना प्रभारी को निजी राजस्व की प्राप्ति होती है, लेकिन अगर कोई ऐसा मामला हो जिसमें थाना प्रभारी को निजी राजस्व की प्राप्ति की संभावना ना दिखती हो तो उस मामले में FIR दर्ज करना तो दूर शिकायत करने में आपकी चप्पलें घिस जाएगी। ये मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब मुद्दा महिला उत्पीड़न से जुड़ा हो। ताजा मामला सक्ती की एक नवविवाहिता पीड़िता से जुड़ा है, जिसकी शादी 20 अप्रैल 2026 को हुई थी, लेकिन दहेज और मानसिक प्रताड़ना के बाद वह लगभग एक महीने के बाद 25 मई को वापस मायके आ गई। इसके बाद पीड़िता ने 29 मई को सक्ती थाना प्रभारी लखन पटेल के समक्ष पेश होकर पति और ससुरालियों पर मामला दर्ज करने के संबंध में लिखित आवेदन पेश की।

पीड़िता के आवेदन पर 27 जून को सक्ती के परिवार परामर्श केंद्र में हुई काउंसलिंग के बाद थाने जाने की सलाह दी गई। आज 27 जून को बीते 41 दिन हो गए लेकिन सक्ती थाना प्रभारी लखन पटेल इस प्रकरण को अपनी कुर्सी के पीछे दबाकर बैठे है। अब इसके पीछे उनकी क्या मंशा है ये तो वही जाने, लेकिन लोग कहने लगे हैं कि बिना भोग के भगवान खुश नहीं होते और बिना चढ़ावे के टीआई खुश नहीं होते।
बता दें कि ये मामला सक्ती के वरिष्ठ पत्रकार से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि जब एक वरिष्ठ पत्रकार को महिला संबंधी अपराध की शिकायत दर्ज कराने में जब इतनी परेशानी उठानी पड़ रही है तो “लखन युग” में आम लोगों को कितनी परेशानी उठानी पड़ रही होगी।

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