सतीश सिहं, गाजियाबाद. उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के कारोबार के खिलाफ अभियान चलाए जा रहा है. इसके तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है. संयुक्त टीम ने देहरादून के देवीपुर, न्यू हाईवे रोड, परवाल क्षेत्र में संचालित एक अवैध फैक्ट्री पर छापा मारकर भारी मात्रा में नकली दवाइयां, कच्चा माल और पैकेजिंग सामग्री बरामद की.

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शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि फैक्ट्री में देश की कई प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नाम और ब्रांड का दुरुपयोग कर नकली (स्प्यूरियस) दवाओं का निर्माण किया जा रहा था.

नामी कंपनियों के नाम पर तैयार हो रही थीं नकली दवाइया

जांच में सामने आया कि फैक्ट्री में Cipla, Lupin, Dr. Reddy’s, Elder, Micro, Mankind, Intas, Abbott, Sun Pharma, Aristo, Macleods और Zydus जैसी प्रमुख दवा कंपनियों के नाम से नकली दवाइयां बनाई जा रही थीं. आरोप है कि इन दवाओं की पैकेजिंग इतनी पेशेवर ढंग से की जाती थी कि आम उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि कई मेडिकल स्टोर संचालक भी असली और नकली दवाओं में अंतर नहीं कर पाते थे.

छापे में मिला भारी मात्रा में सामान

एफएसडीए और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री से तैयार नकली दवाइयां, कच्चा माल, पैकिंग मशीनें, लेबल, रैपर और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है. जब्त किए गए सभी सामान को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है. अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार कई राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं.

पूरे सप्लाई नेटवर्क की होगी जांच

अधिकारियों ने बताया कि अब यह पता लगाया जा रहा है कि तैयार की गई नकली दवाइयां किन-किन राज्यों, मेडिकल स्टोरों और बाजारों में भेजी जा रही थीं. जांच एजेंसियां सप्लाई चेन, जुड़े लोगों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं. मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.

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जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर सख्ती

एफएसडीए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नकली दवाओं का निर्माण और वितरण जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है. संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. विभाग ने कहा कि प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.