सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शैक्षिक नेतृत्व को और सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के अनुरूप राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने प्रधानाचार्यों के लिए ‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका और उसकी प्रशिक्षण मार्गदर्शिका तैयार की है. इसका उद्देश्य विद्यालय प्रमुखों को प्रभावी नेतृत्व, बेहतर प्रबंधन और संस्थागत गुणवत्ता सुधार के लिए एक समान और व्यावहारिक संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराना है.

‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका को सहयोगात्मक प्रक्रिया के तहत विकसित किया गया है. इसे राजकीय, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा. इससे प्रदेश के सभी विद्यालयों में नेतृत्व और प्रबंधन की एक समान कार्यदृष्टि विकसित करने में मदद मिलेगी.

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एससीईआरटी के अनुसार किसी भी विद्यालय की गुणवत्ता का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसका नेतृत्व होता है. इसी सोच को केंद्र में रखकर तैयार की गई ‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका विद्यालय प्रमुखों को उत्तरदायी, परिणामोन्मुखी और गुणवत्ता-केंद्रित कार्य-संस्कृति विकसित करने में मदद करेगी. यह विद्यालय संचालन, संस्थागत विकास और शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में कार्य करेगी. इसके साथ तैयार की गई प्रशिक्षण मार्गदर्शिका प्रधानाचार्यों को हस्तपुस्तिका के प्रभावी उपयोग और उसके प्रावधानों को व्यवहार में लागू करने में सहयोग प्रदान करेगी.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना को मिलेगा बल

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप विद्यालयी नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. इसका उद्देश्य विद्यालय प्रमुखों की नेतृत्व क्षमता का विकास करना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्थागत सुधार की प्रक्रिया को गति देना है. इससे विद्यालयों में सकारात्मक और परिणामोन्मुखी शैक्षिक वातावरण विकसित करने में सहायता मिलेगी.

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विद्यालयों में विकसित होगी एक समान नेतृत्व संस्कृति

‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका के माध्यम से विद्यालयों में नेतृत्व और प्रबंधन की एक समान संस्कृति विकसित करने का प्रयास किया गया है. इससे प्रधानाचार्यों को बेहतर निर्णय लेने, सहयोगात्मक कार्य-संस्कृति विकसित करने और गुणवत्ता सुधार के प्रयासों को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.

एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार ने कहा कि ‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका प्रधानाचार्यों के लिए तैयार की गई एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है, जिसका उद्देश्य विद्यालयी नेतृत्व, शैक्षिक गुणवत्ता और संस्थागत कार्य-संस्कृति को सुदृढ़ बनाना है. उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों से इसका गंभीरतापूर्वक अध्ययन कर इसे अपने सहयोगी शिक्षकों के साथ साझा करने और इसके प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया. वहीं, समग्र शिक्षा के अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णुकान्त पाण्डेय ने कहा कि प्रधानाचार्य किसी भी विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता और संस्थागत विकास के प्रमुख आधार होते हैं. ‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका और प्रशिक्षण मार्गदर्शिका विद्यालयों में प्रभावी नेतृत्व को नई दिशा देने का कार्य करेगी.