सूरत : पश्चिम एशिया सहित वैश्विक स्तर पर जारी जियो-पॉलिटिकल तनाव और युद्ध की स्थितियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री लॉजिस्टिक्स में बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होने के कारण समुद्री मार्ग से माल भेजने वाले कंटेनर का भाड़ा अचानक 4 गुना तक बढ़ गया है। जिस कंटेनर का किराया पहले औसतन $800 (800 डॉलर) हुआ करता था, उसका भाड़ा अब बढ़कर $3000 से $3400 (3400 डॉलर) तक पहुंच गया है।

कंटेनर के किरायों में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी के साथ-साथ दुनियाभर के प्रमुख बंदरगाहों पर जहाजों का भारी ट्रैफिक जाम (पोर्ट कंजेशन) लग गया है। इस वजह से सूरत के टेक्सटाइल, एम्ब्रॉयडरी और डायमंड सेक्टर को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

सामान्य परिस्थितियों में चीन, जापान, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों से सूरत के उद्योगों के लिए आने वाली अत्याधुनिक मशीनें जो पहले 30 दिनों (1 महीने) में पहुंच जाती थीं, वे अब पोर्ट्स पर फंसे रहने के कारण 60 से 90 दिनों (2 से 3 महीने) में सूरत पहुंच पा रही हैं। डिलीवरी समय दो से तीन गुना बढ़ने के कारण स्थानीय उद्योगपतियों द्वारा शुरू की गई नई यूनिट्स, प्लांट अपग्रेडेशन और विस्तार से जुड़ी योजनाएं अधर में लटक गई हैं। उद्यमी महीनों से मशीनों के आने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनका प्रोडक्शन साइकिल भी प्रभावित हुआ है।

इम्पोर्ट बिजनेस से जुड़े प्रमुख उद्यमी रमेश वघासिया ने बताया कि युद्ध की अनिश्चित परिस्थितियों के कारण दुनिया के मुख्य पोर्ट्स पर जहाज लंबे समय तक फंसे हुए हैं। बंदरगाहों पर जहाजों की भारी किल्लत का फायदा उठाकर शिपिंग कंपनियां मनमाना किराया वसूल रही हैं और डिलीवरी में अत्यधिक देरी हो रही है।

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