Global Liveability Index: इन दिनों दिल्ली मानसून की चादर ओढ़े हुए है। बीते दिन राजधानी के कई हिस्सों में हुई झमाझम बारिश से तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिली। लगातार बारिश का असर वायु गुणवत्ता पर भी देखने को मिला है और दिल्ली की हवा पहले के मुकाबले अधिक साफ दर्ज की गई। इसी बीच हाल ही में जारी ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स में दिल्ली को 120वां स्थान मिला है। इस रैंकिंग के साथ राजधानी ने देश के कई अन्य बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है। इंडेक्स के अनुसार, मुंबई 121वें, चेन्नई 123वें और बेंगलुरु 127वें स्थान पर हैं। यानी रहने योग्य शहरों की इस वैश्विक रैंकिंग में दिल्ली इन प्रमुख भारतीय महानगरों से आगे रही।

हाल ही में जारी ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन को दुनिया का सबसे रहने योग्य शहर घोषित किया गया है। इस साल कोपेनहेगन ने लंबे समय से शीर्ष स्थान पर रहे ऑस्ट्रिया के वियना को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। रैंकिंग में वियना दूसरे और ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न तीसरे स्थान पर रहा। ये शहर स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण, सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता जैसे मानकों पर बेहतर प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष स्थानों पर पहुंचे हैं। वहीं, भारतीय शहरों की बात करें तो दिल्ली को 120वां स्थान मिला है। इस रैंकिंग में दिल्ली ने मुंबई (121वां), चेन्नई (123वां) और बेंगलुरु (127वां) जैसे प्रमुख महानगरों को पीछे छोड़ दिया है।

किन मानकों पर तय होती है ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स की रैंकिंग

इस सप्ताह जारी ‘इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026’ में दुनिया के 173 शहरों का आकलन किया गया। इन शहरों को वहां रहने की गुणवत्ता और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर रैंकिंग दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली और मुंबई की रैंकिंग में पिछले वर्ष की तुलना में कोई बदलाव नहीं हुआ। वहीं, चीन के 10 शहरों की रैंकिंग में 2025 के मुकाबले सुधार दर्ज किया गया है। यह रैंकिंग मुख्य रूप से स्थिरता (Stability), स्वास्थ्य सेवाएं (Healthcare), संस्कृति एवं पर्यावरण (Culture & Environment), शिक्षा (Education) और बुनियादी ढांचा (Infrastructure) जैसे प्रमुख मानकों के आधार पर तैयार की जाती है। इन सभी पहलुओं के प्रदर्शन को मिलाकर प्रत्येक शहर का कुल स्कोर निर्धारित किया जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी यूरोप अब भी रहने के लिहाज से दुनिया का सबसे बेहतर क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि उसका औसत स्कोर इस वर्ष स्थिर रहा। दूसरी ओर, एशिया के शहरों के औसत स्कोर में सुधार दर्ज किया गया है, जो क्षेत्र में जीवन गुणवत्ता में बढ़ोतरी का संकेत देता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईरान-इजरायल संघर्ष का असर खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ा है, जिससे वहां के कुछ शहरों के प्रदर्शन पर भी प्रभाव देखने को मिला।

ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स के टॉप-100 से बाहर भारत

इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026 के अनुसार, दुनिया के टॉप-100 रहने योग्य शहरों में भारत का कोई भी शहर जगह नहीं बना सका। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शहरों को स्वास्थ्य सेवाओं (Healthcare), बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और वायु गुणवत्ता (Air Quality) जैसे प्रमुख मानकों पर अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि भारत के प्रमुख महानगर शीर्ष 100 की सूची में शामिल नहीं हो सके। हालांकि, भारतीय शहरों में दिल्ली 120वें, मुंबई 121वें, चेन्नई 123वें और बेंगलुरु 127वें स्थान पर रहे। इससे स्पष्ट है कि भारतीय शहरों में सुधार की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है।

दुनिया के टॉप-10 रहने योग्य शहर:

कोपेनहेगन (डेनमार्क)

वियना (ऑस्ट्रिया)

ज्यूरिख (स्विट्जरलैंड)

मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया)

जिनेवा (स्विट्जरलैंड)

सिडनी (ऑस्ट्रेलिया)

ओसाका (जापान)

ऑकलैंड (न्यूज़ीलैंड)

एडिलेड (ऑस्ट्रेलिया)

टोक्यो (जापान)

रैंकिंग में शीर्ष स्थान पाने वाले इन शहरों ने स्थिरता, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बुनियादी ढांचा, संस्कृति और पर्यावरण जैसे प्रमुख मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

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