सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने चंडीगढ़ बैठक में बैठने की व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। उन्होंने पार्टी विधायकों की एकजुटता पर सवाल उठाकर नई सियासत शुरू कर दी है।
चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में नए प्रभारी संजय दत्त के नेतृत्व में संगठन को मजबूत करने की कवायद के बीच पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया के एक बयान ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को नई चर्चा दे दी है। सेतिया ने न केवल मंच पर बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि यह कहकर संगठन की स्थिति पर भी टिप्पणी की कि, “जब 32 विधायक ही नहीं संभल रहे, तो संगठन कैसे संभलेगा?”
दरअसल, 8 जुलाई को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में नए प्रभारी संजय दत्त की पहली बैठक आयोजित की गई थी। बैठक का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाना था, लेकिन बैठक के कुछ दिन बाद ही मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आ गया।
शनिवार को सिरसा में मीडिया से बातचीत के दौरान गोकुल सेतिया ने बिना नाम लिए पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया, उन्हें ही मंच पर आगे बैठाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पार्टी को हाशिए पर धकेलने की कोशिश की जा रही है।
सेतिया ने बताया कि मंच के पीछे लगी कुर्सियों पर उनके, विधायक देवेंद्र हंस और विधायक विकास साहरण के नाम की पर्चियां लगाई गई थीं। तीनों नेताओं ने उन पर्चियों को फाड़ दिया और आगे जाकर बैठ गए। उनके अनुसार, यह व्यवस्था जनप्रतिनिधियों के सम्मान के अनुरूप नहीं थी।
इसके बाद सेतिया ने संगठनात्मक स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 37 विधायक जीतकर आए थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव के बाद चार-पांच विधायक पार्टी छोड़ गए। ऐसे में यदि मौजूदा विधायक ही एकजुट नहीं रह पा रहे हैं, तो संगठन को मजबूत करने की बात कैसे सफल होगी।
हालांकि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने सेतिया के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मंच पर बैठने की व्यवस्था में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया था और सभी नेताओं को सम्मान दिया गया।
राजनीतिक गलियारों में सेतिया के बयान को केवल मंच की व्यवस्था तक सीमित नहीं माना जा रहा। माना जा रहा है कि यह बयान कांग्रेस के भीतर चल रही असंतुष्टि और संगठनात्मक चुनौतियों की ओर भी इशारा करता है। ऐसे समय में जब नए प्रभारी संजय दत्त लगातार बैठकों के जरिए संगठन में नई ऊर्जा भरने और नेताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, पार्टी के भीतर से उठ रही ऐसी आवाजें उनके सामने चुनौती को और बढ़ा सकती हैं।

