अनुज पांडेय, गोपालगंज। नेपाल के तराई और जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब बिहार के गोपालगंज जिले में साफ तौर पर दिखने लगा है। यहां से गुजरने वाली गंडक नदी ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण इसके तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का विकराल संकट उत्पन्न हो गया है। पानी इतनी तेजी से रिहायशी इलाकों में फैल रहा है कि दियारा क्षेत्र के दर्जनों गांवों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों के सामने रोजी-रोटी के साथ-साथ रहने का भी संकट खड़ा हो गया है।

​सदर और मांझा प्रखंडों में सबसे बुरा हाल

​गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने गोपालगंज जिले के सदर और मांझा प्रखंडों में सबसे अधिक तबाही मचाई है।

  • ​सदर प्रखंड: यहां के कई प्रमुख इलाके जैसे रामनगर, मेहंदिया, जगिरी टोला, खाप मकसूदपुर, कमल चौधरी का टोला, रामपुर टेंगराही और राजवाही गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं।
  • ​मांझा प्रखंड: इस प्रखंड के नेमुईया गांव के भीतर भी गंडक का पानी तेजी से प्रवेश कर चुका है, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है।

​ठप हुआ जनजीवन और डूबे सरकारी संस्थान

​बाढ़ के इस तांडव ने केवल रिहायशी इलाकों को ही अपनी चपेट में नहीं लिया है, बल्कि इसने सरकारी बुनियादी ढांचे को भी तहस-नहस कर दिया है। आधा दर्जन से अधिक गांवों में प्राथमिक विद्यालय, प्लस-टू हाई स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र (हेल्थ सेंटर) पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं।
​पानी के तेज बहाव और संपर्क सड़कों के जलमग्न हो जाने के कारण करीब दो दर्जन गांवों का सीधा संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। आवागमन के सभी साधन ठप पड़ने की वजह से लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं। जरूरतों के लिए भी लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

​ग्रामीणों में आक्रोश और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

​इस आपदा की घड़ी में स्थानीय ग्रामीणों के बीच जिला प्रशासन के रवैये को लेकर गहरा आक्रोश और भारी चिंता व्याप्त है। बाढ़ पीड़ितों का सीधा आरोप है कि पानी में पूरी तरह घिरे होने और भुखमरी जैसी स्थिति बनने के बावजूद अब तक जिला प्रशासन या स्थानीय अधिकारियों की ओर से उनकी कोई सुध नहीं ली गई है।
​प्रभावित क्षेत्रों में न तो पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री बांटी गई है और न ही आने-जाने के लिए नावों का कोई इंतजाम किया गया है। दियारा इलाके के लोग खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं और सरकार तथा प्रशासन से जल्द से जल्द राहत और बचाव कार्य शुरू करने की गुहार लगा रहे हैं।