FCRA बिल जेपीसी में भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पास हो गया है. केंद्र सरकार ने आज बुधवार को विपक्ष के भारी विरोध के बीच ‘विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक (FCRA), 2026’ को जेपीसी के पास भेज दिया है. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने ये प्रस्ताव सदन में रखा, जिसे हंगामे के बीच पास भी कर दिया गया. कांग्रेस और DMK ने विरोध करते हुए बिल वापस लेने की मांग की.
लोकसभा में बुधवार 12 अगस्त 2026 को मॉनसून सत्र के दौरान FCRA संशोधन बिल पेश किया गया. इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा विपक्ष बिल के खिलाफ है.
लोकसभा में FCRA बिल को जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे मंजूर कर लिया गया. अमित शाह की जगह गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने FCRA बिल को लोकसभा में पेश किया. हालांकि बिल का विरोध करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह अल्पसंख्यकों के खिलाफ बिल है.
FCRA संशोधन विधेयक पर घमासान के बीच सरकार ने इस बिल को संसद की 31 सदस्यीय ज्वाइंट पर्लियामेंट्री कमिटी के पास भेजने का प्रस्ताव किया है. FCRA Amendment Bill 2026 को विस्तृत समीक्षा के लिए लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल होंगे. समिति को अगले सत्र तक अपना जवाब देना होगा.
फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. हालांकि, विपक्ष ने सदन में जोरदार विरोध किया. उन्होंने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि अगर किसी सदस्य को बिल के किसी प्रावधान पर आपत्ति है तो वह JPC के सामने अपनी बात रख सकता है.
FCRA कानून विदेशी चंदे या योगदान को प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है. विधेयक में FCRA कानून या उसके नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम जेल की सजा को मौजूदा 5 साल से घटाकर 1 साल करने का प्रस्ताव है.
बिल के प्रावधानों को लेकर विपक्ष और कुछ धार्मिक संस्थाओं ने चिंता जताई है. विरोध करने वालों का कहना है कि विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों पर सरकार को व्यापक अधिकार देने से कार्यपालिका की शक्तियां बढ़ सकती हैं.
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