हरियाणा में अत्यधिक दोहन और बदलते बारिश के पैटर्न से भूजल स्तर घट रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने इसके लिए कृत्रिम जल रिचार्ज को अनिवार्य बताया है।

हरियाणा: राज्य में भूजल का गिरता स्तर एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ डीन डॉ. अजय कुमार ने चेतावनी दी है कि अच्छी गुणवत्ता वाले पानी का अत्यधिक दोहन भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि सिरसा, हिसार, जींद, कुरुक्षेत्र, कैथल और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में भूजल दोहन की दर चिंताजनक है, क्योंकि वहां पानी की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण इसका उपयोग अधिक हो रहा है। वर्षा से भूजल की पर्याप्त भरपाई न हो पाने के कारण यह भंडार तेजी से खाली हो रहे हैं। आधुनिक तकनीक और गहरे बोरिंग ने इस दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है, जिससे जल स्तर नीचे चला गया है।

बारिश के बदलते मिजाज से बढ़ी मुश्किलें

डॉ. कुमार ने आगे बताया कि राज्य में बारिश का पैटर्न भी पूरी तरह बदल चुका है। हरियाणा में दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ती बारिश का औसत 400 से 1100 मिमी के बीच रहता है, लेकिन अब इसमें भारी असंतुलन देखा जा रहा है। कहीं बेतहाशा बारिश तो कहीं सूखे जैसे हालात जल चक्र को प्रभावित कर रहे हैं। इस बदलते परिवेश में केवल वर्षा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल के उपयोग और संरक्षण के बीच संतुलन नहीं बनाया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और भी विकराल हो सकती है। कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए अब जल संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना समय की सबसे बड़ी मांग है।

कृत्रिम जल रिचार्ज और भविष्य की राह

भूजल संकट से निपटने के लिए डॉ. अजय कुमार ने कृत्रिम जल रिचार्ज को एक अनिवार्य उपाय बताया है। नहरों और अन्य उपलब्ध जल स्रोतों के माध्यम से पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने से भूजल भंडार को दोबारा भरा जा सकता है। उन्होंने एक रोचक तथ्य साझा करते हुए कहा कि राज्य के अधिकांश हिस्सों के विपरीत, नूंह जिले में जलस्तर ऊपर आ रहा है, लेकिन वहां का पानी पीने या खेती के लिए अनुपयुक्त है। वहीं, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. कंबोज के नेतृत्व में किसानों को जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकें दी जा रही हैं। यह प्रयास न केवल खेती को लाभप्रद बनाएंगे बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण भी सुनिश्चित करेंगे।