कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्वार की बुवाई के लिए जून का पहला पखवाड़ा सबसे उत्तम है। शिविर में किसानों को फसल प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों के टिप्स दिए गए।

अजय सैनी, भिवानी। प्रदेश के रेतीले और बारानी क्षेत्रों में ग्वार एक महत्वपूर्ण फसल है, जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है। चौ. चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के सेवानिवृत वैज्ञानिक डा. आर.के. सैनी ने खंड लोहारू के गांव ढाणा जोगी में आयोजित एक कृषि शिविर में किसानों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि जहाँ सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहाँ जून के पहले पखवाड़े में ग्वार की बुवाई करना सबसे अधिक लाभदायक होता है। किसानों को सलाह दी गई कि वे गहरा चलेवा करके बुवाई करें, ताकि मानसून की पहली बारिश से पहले पौधे खेतों में अच्छी तरह से स्थापित हो सकें और भविष्य में बेहतर उत्पादन मिल सके।

खाद और जल संरक्षण की सीख

शिविर के दौरान विश्वविद्यालय के सेवानिवृत वैज्ञानिक डा. जगदेव सिंह ने जल-संरक्षण के आधुनिक उपायों पर विशेष बल दिया। उन्होंने किसानों को समझाया कि फसल की जड़ों के समुचित विकास के लिए फासफोरस युक्त उर्वरकों का उपयोग करना अनिवार्य है। इसके अलावा, शिविर में बाजरा, मूंग, नरमा और सब्जियों की पैदावार बढ़ाने के तरीकों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कृषि विकास अधिकारी डा. संदीप यादव ने सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने फसल अवशेषों को जलाने के बजाय भूमि में दबाने और प्राकृतिक खेती के छोटे से हिस्से को अपनाने का आग्रह किया।

किसानों की समस्याओं का समाधान

ढाणा जोगी में आयोजित इस विशेष शिविर में 70 से अधिक किसानों ने भाग लिया और कृषि विशेषज्ञों से खेती से जुड़ी अपनी विभिन्न समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। वैज्ञानिकों ने किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाने की सलाह दी। शिविर का समापन किसानों के आत्मविश्वास के साथ हुआ, क्योंकि उन्हें ग्वार सहित अन्य फसलों की बुवाई से लेकर कटाई तक के बेहतर प्रबंधन का ज्ञान मिला। सरकार और कृषि विभाग का यह साझा प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और प्रदेश की कृषि उपज में गुणवत्तापूर्ण सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।