भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी को 21 जुलाई के दिल्ली प्रदर्शन से पहले कुरुक्षेत्र में पुलिस ने समर्थकों समेत हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के विरोध में आक्रोशित किसानों ने कुरुक्षेत्र के पिहोवा थाना टोल प्लाजा पर कब्जा कर यातायात ठप्प कर दिया।
कुरुक्षेत्र। 21 जुलाई को राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन से ठीक पहले हरियाणा पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को समर्थकों के साथ हिरासत में ले लिया। कुरुक्षेत्र से दिल्ली जाते समय हुई इस पुलिस कार्रवाई की खबर फैलते ही किसान भड़क उठे और उन्होंने कुरुक्षेत्र स्थित पिहोवा थाना टोल नाके पर पहुंचकर यातायात पूरी तरह बाधित कर दिया।
सड़क पर धरने पर बैठे किसान प्रतिनिधियों ने शासन व पुलिस महकमे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक उनके नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी और सहयोगियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक टोल नाके से हटने का सवाल ही नहीं उठता।
फेसबुक वीडियो से फैली खबर
दरअसल, बीकेयू (चढ़ूनी) ने कृषि से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर 21 जुलाई को दिल्ली में विरोध मार्च की अपील की थी। इसी सिलसिले में कुरुक्षेत्र से रवाना होते वक्त पुलिस प्रशासन ने चढ़ूनी को हिरासत में ले लिया।
इस घटनाक्रम के तुरंत बाद चढ़ूनी के ऑफिशियल फेसबुक हैंडल पर उनके बेटे का एक वीडियो संदेश प्रसारित हुआ। वीडियो में उन्होंने अपने पिता और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी का दावा किया, जिसके बाद पिहोवा थाना टोल प्लाजा सहित हरियाणा के कई हिस्सों में किसानों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
किसान नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
धरनास्थल पर ब्लॉक अध्यक्ष जोगिंदर काजल, राजेश संधोला, गुरतेज सिंह, अनोख सिंह, निशान सिंह, जसमेर सिंह, शीतल सिंह, अजैब सिंह और करतार सिंह ने सभा को संबोधित किया। वक्ताओं का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जा रहे किसान प्रतिनिधियों को बीच रास्ते रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है।
जोगिंदर काजल ने कहा कि सरकार मांगों का समाधान निकालने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा।
इन मांगों को लेकर था प्रदर्शन
किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक दिल्ली मार्च का प्रमुख एजेंडा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सभी फसलों के लिए एमएसपी का वैधानिक अधिकार प्राप्त करना है।
इसके अतिरिक्त पिछले आंदोलनों में दर्ज मुकदमों की समाप्ति, मृतक किसानों के आश्रितों को आर्थिक सहायता व नौकरी, खाद-बीज और बिजली-डीजल की दरों में रियायत, पारदर्शी फसल बीमा और ऋण मुक्ति जैसे मुद्दे इसमें शामिल हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस व्यवस्था तैनात रखी गई है।


