हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी समय पर न देने को लेकर सख्त कदम उठाया है। आयोग ने गुरुग्राम के वजीराबाद के तत्कालीन तहसीलदार पर नियमों की अनदेखी के लिए जुर्माना लगाया है।
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई बेहद जरूरी जानकारी देने में चार वर्ष से अधिक की लंबी देरी को गंभीर लापरवाही माना है। आयोग ने इस बड़ी प्रशासनिक कोताही के लिए गुरुग्राम के वजीराबाद के तत्कालीन राज्य लोक सूचना अधिकारी (SPIO)-सह-तहसीलदार पर 25 हजार रुपये का भारी जुर्माना ठोक दिया है। राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने साफ किया कि आरटीआई कानून के तहत निर्धारित 30 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा का उल्लंघन बिना किसी ठोस वजह के किया गया था। इस मामले की पूरी सुनवाई के दौरान तत्कालीन तहसीलदार की तरफ से पेश किया गया स्पष्टीकरण आयोग को पूरी तरह से असंतोषजनक और गैर-जिम्मेदाराना लगा जिसके बाद यह कड़ा दंडात्मक आदेश पारित किया गया है।
पुराना रिकॉर्ड न होने की दलील खारिज
राज्य सूचना आयोग ने यह सख्त आदेश शिकायतकर्ता हरिंदर ढींगरा की तरफ से दाखिल की गई एक पुरानी शिकायत पर पूरी सुनवाई करने के बाद जारी किया है। यह पूरा मामला आठ नवंबर 2022 को दायर किए गए एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा हुआ था जिसके बाद विभाग की तरफ से तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। जवाब में तत्कालीन एसपीआईओ ने अपनी सफाई में कहा था कि मांगी गई गोपनीय जानकारी रिकॉर्ड रूम में उसी रूप में उपलब्ध नहीं थी जिसके कारण पुराने दस्तावेजों के संकलन में लंबा समय लगा। आयोग ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि ऐसी कोई व्यावहारिक समस्या थी तो भी आवेदक को निर्धारित 30 दिनों की समय-सीमा के भीतर इसकी लिखित सूचना देना कानूनी रूप से बेहद अनिवार्य था।
उच्च न्यायालय के फैसले का दिया हवाला
सूचना आयोग की सुनवाई के दौरान नायब तहसीलदार ने विभाग की तरफ से सूचना देने में हुई इस बड़ी देरी को स्वीकार भी किया था लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि महज अपनी गलती मान लेने से दंडात्मक कार्रवाई से छूट बिल्कुल नहीं मिल सकती है। आयोग ने पाया कि अधिकारी ने सुनवाई से ठीक एक दिन पहले 18 जून 2026 को जवाब भेजा था जो केवल कार्रवाई से बचने का एक दिखावा था। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए आयोग ने गुरुग्राम के उपायुक्त को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी के वेतन से 25 हजार रुपये की वसूली सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही भविष्य में सभी आरटीआई आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने और कड़ा निगरानी तंत्र विकसित करने की कड़ी हिदायत भी प्रशासन को जारी की गई है।

