कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। कहा जाता है कि डॉग इंसान का सबसे वफादार साथी होता है…लेकिन जब यही वफादारी देश की सुरक्षा के काम आती है, तो ये चार पैर वाले जांबाज किसी जवान से कम नहीं होते। ग्वालियर में 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान टेकनपुर BSF के श्वान प्रशिक्षण केंद्र से आए प्रशिक्षित श्वानों ने अपनी ऐसी दक्षता दिखाई कि मैदान में मौजूद लोग देखते रह गए। आतंकियों को पकड़ने से लेकर बम और विस्फोटक खोजने तक… ऊंची दीवारें पार करने से लेकर स्वच्छता का संदेश देने तक…इन जांबाजों ने एक के बाद एक हैरतअंगेज करतब दिखाए। 

दर्शक तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं सके

ग्वालियर के कम्पू स्थित एसएएफ मैदान पर 80वें स्वतंत्रता दिवस का भव्य समारोह, देशभक्ति के माहौल के बीच जब BSF के श्वान मैदान में उतरे तो हर किसी की निगाहें उन पर टिक गईं,BSF के टेकनपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर के श्वान प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षित इन देशी नस्ल के श्वानों ने अपनी काबिलियत का ऐसा प्रदर्शन किया कि दर्शक तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं सके। कभी आतंकियों को पकड़ने का अभ्यास तो कभी कई फीट ऊंची दीवार को छलांग लगाकर पार करना, इन श्वानों ने हर चुनौती को बेहद आसानी से पूरा किया।बम और विस्फोटक की तलाश हो, ऊंची और खड़ी सीढ़ियों पर चढ़ना-उतरना हो या अपने हैंडलर के इशारे पर तत्काल प्रतिक्रिया देना, हर करतब में इनकी ट्रेनिंग और अनुशासन साफ नजर आया।

प्रशिक्षित श्वानों ने अतिथियों का किया स्वागत

सबसे खास रहा इनका वो अंदाज, जिसने सुरक्षा से लेकर सामाजिक संदेश तक सबको जोड़ दिया। प्रशिक्षित श्वानों ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पुष्पगुच्छ दिया,तो स्वच्छ भारत मिशन का संदेश देते हुए कचरे को उठाकर डस्टबिन में डालकर दिखाया।BSF अधिकारियों के मुताबिक देश की सुरक्षा के लिए श्वानों को अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षित करने का काम वर्ष 1970 से किया जा रहा है। टेकनपुर स्थित श्वान प्रशिक्षण केंद्र अब तक करीब छः हजार से ज्यादा श्वानों को प्रशिक्षित कर चुका है।इनमें नारकोटिक्स, एक्सप्लोसिव, ट्रैकर, वाइल्ड लाइफ, ड्रोन, माइंस डिटेक्शन सहित कई दूसरी विशेषज्ञताएं शामिल हैं।

BSF अब ‘वोकल फॉर लोकल’ की तर्ज पर देशी नस्ल के श्वानों को भी सुरक्षा के लिए तैयार कर रहा

खास बात ये है कि BSF अब ‘वोकल फॉर लोकल’ की तर्ज पर देशी नस्ल के श्वानों को भी सुरक्षा के लिए तैयार कर रहा है। करीब 20 प्रतिशत श्वान देशी नस्ल के होते हैं। इनमें उत्तर भारत के रामपुर हाउंड और दक्षिण भारत के मुधोल हाउंड जैसी नस्लें शामिल हैं।इन देशी श्वानों को उनकी क्षमता और विशेषज्ञता के हिसाब से प्रशिक्षित करने में आमतौर पर छह से नौ महीने का समय लगता है। कई श्वान इससे पहले ही प्रशिक्षण पूरा कर लेते हैं,रामपुर हाउंड और मुधोल हाउंड जैसे देशी श्वानों की खासियत ने विदेशी नस्लों को लेकर बनी धारणा को भी चुनौती दी है। BSF के मुताबिक इन नस्लों में शानदार ट्रैकिंग क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार काम करने की गजब की दक्षता होती है।

ग्वालियर के टेकनपुर में स्थित BSF का श्वान प्रशिक्षण केंद्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान रखता है। यहां देश ही नहीं, विदेशों की सुरक्षा एजेंसियों के श्वानों को भी प्रशिक्षण दिया जाता है,स्वतंत्रता दिवस के इस समारोह में इन चार पैर वाले जांबाजों ने सिर्फ करतब नहीं दिखाए, बल्कि ये भी साबित किया कि देश की सुरक्षा में इनकी भूमिका कितनी अहम है। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ग्वालियर के SAF मैदान में दिखा इनका प्रदर्शन लोगों के लिए रोमांच से भरा रहा और देश की सुरक्षा में इन मूक योद्धाओं के योगदान की एक शानदार झलक भी देखने को मिली।

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