कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर नगर निगम परिषद के विशेष सम्मेलन में एक बार फिर हंगामा देखने को मिला। आयुक्त संघ प्रिय के बयान पर बीजेपी पार्षद मोहित जाट ने आपत्ति जताई। दरअसल सोमवार को हुई परिषद में आयुक्त के बैठक छोड़कर जाने को लेकर पार्षद ने सवाल उठाए थे। आयुक्त ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें हाईकोर्ट से अर्जेंट कॉल आया था, इसलिए बैठक से जाना पड़ा। हालांकि, अपनी सफाई के दौरान आयुक्त ने कुछ पार्षदों के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद सदन में माहौल गरमा गया।
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आयुक्त संघ प्रिय ने कहा कि हाईकोर्ट से अर्जेंट कॉल आने की वजह से उन्हें बैठक छोड़कर जाना पड़ा। उन्होंने सदन का अपमान करने के आरोप से इनकार किया। लेकिन इसी दौरान उन्होंने कुछ पार्षदों पर अपने क्षेत्र में काम कराने के लिए दबाव बनाने और कार्रवाई रुकवाने के आरोप लगाए। आयुक्त ने कहा कि कई पार्षद अपनी मर्जी के मुताबिक काम चाहते हैं और जब किसी काम में देरी को लेकर कार्रवाई होती है, तो उसे रुकवाने के लिए पार्षद खुद मौके पर पहुंच जाते हैं।
आयुक्त के इस बयान पर बीजेपी पार्षद मोहित जाट ने आपत्ति जताई। उन्होंने आयुक्त के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि जिस कार्रवाई को रोकने वह मौके पर पहुंचे थे,उसमें गलत कार्रवाई की जा रही थी और इसमें उनका कोई निजी हित नहीं था।वहीं, सभापति मनोज सिंह तोमर ने सदन में किसी बड़े विवाद की स्थिति से इनकार किया। उन्होंने कहा कि बैठक का एजेंडा पूरा हो चुका था। हालांकि, आयुक्त के बयान और बीजेपी पार्षद के पलटवार के बाद आरोप-प्रत्यारोप जरूर तेज हो गए।
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हंगामे और तीखी बहस के बीच नगर निगम परिषद का विशेष सम्मेलन खत्म हो गया। लेकिन बैठक के दौरान सामने आया टकराव एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर गया कि शहर के विकास और पार्षदों की मांगों से शुरू हुई परिषद की बैठक आखिर अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक क्यों पहुंच रही है।
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