कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। Special Package Story: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच आत्मनिर्भर ईंधन उत्पादन की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। ग्वालियर की लाल टिपारा आदर्श गौशाला में स्थापित सीबीजी यानी कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लोकार्पित यह प्लांट गोबर और गीले कचरे से सीएनजी तैयार करता है, लेकिन पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिलने के कारण यह अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि जब देश वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ रहा है, तब ग्वालियर का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट संसाधनों की कमी से क्यों जूझ रहा है?
ग्वालियर नगर निगम के अधीन संचालित लाल टिपारा आदर्श गौशाला प्रदेश की सबसे बड़ी गौशालाओं में से एक है। यहां लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में स्थापित सीबीजी प्लांट गोबर और मंडी वेस्ट से कंप्रेस्ड बायोगैस यानी सीएनजी का उत्पादन करता है। यह वही मॉडल है जिसे इंदौर में भी सफलतापूर्वक लागू किया गया है और दोनों परियोजनाओं का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। प्लांट की वर्तमान उत्पादन क्षमता करीब 1200 किलो सीएनजी प्रतिदिन है, यदि पर्याप्त मात्रा में गोबर और ग्रीन वेस्ट मिले तो उत्पादन 1800 किलो प्रतिदिन तक पहुंच सकता है।
- लाल टिपारा आदर्श गौशाला में सीबीजी प्लांट
- वर्तमान उत्पादन 1200 KG प्रतिदिन
- पूरी उत्पादन क्षमता 1800 KG प्रतिदिन
- जरूरत है 100 टन गोबर + 20 टन मंडी वेस्ट
- उपलब्धता सिर्फ 60-70 टन गोबर
- मंडी वेस्ट की भारी कमी

गौशाला के व्यवस्थापक ऋषभदेवानंद महाराज का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां भारत के लिए अवसर लेकर आई हैं। यदि स्थानीय स्तर पर बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए तो ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए प्लांट तक पर्याप्त मात्रा में गोबर और मंडी से निकलने वाला ग्रीन वेस्ट पहुंचना जरूरी है।
निगम ने किया ये दावा
इधर नगर निगम का दावा है कि समस्या के समाधान के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। निगम कमिश्नर संघ प्रिय ने कहा कि निगम ने गोबर संग्रहण बढ़ाने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की है। साथ ही शहर की बड़ी मंडियों के साथ बैठकें कर ग्रीन वेस्ट को सीधे सीबीजी प्लांट तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है।
सीबीजी प्लांट डायरेक्टर निखिल ऋषि का कहना है कि उत्पादन फिलहाल उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जा रहा है। उनका तर्क है कि जिस प्रकार किसी व्यक्ति को काम करने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार इस प्लांट को भी गोबर और ग्रीन वेस्ट की जरूरत है। जितना कच्चा माल मिलेगा, उतना ही अधिक गैस उत्पादन संभव होगा।
मध्य प्रदेश के लक्ष्य को मिलेगी नई गति ?
देश में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल होते हुए तीसरे स्थान पर है और ग्वालियर का यह प्लांट स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन और आत्मनिर्भर ईंधन उत्पादन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। लेकिन वर्तमान में कच्चे माल की कमी इसकी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। मिडिल ईस्ट में पैदा हुए हालातों ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करना समय की जरूरत है। ऐसे में यदि गोबर और ग्रीन वेस्ट की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो जाती है तो लाल टिपारा का यह सीबीजी प्लांट न केवल अधिक सीएनजी उत्पादन कर सकेगा, बल्कि स्वच्छ और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लक्ष्य को भी नई गति देगा।

