Dharm Desk – हरछठ यानी हलषष्ठी का व्रत संतान की लंबी उम्र, संकटों से रक्षा की कामना के लिए रखा जाता है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व 2 सितंबर, बुधवार को रखा जाएगा। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बल राम का जन्म हुआ था। इसी वहज से इस दिन हल और कृषि से जुड़ी चीजों का विशेष महत्व माना जाता है। हरछठ को हलछठ, हलषष्ठी, ललई छठ और ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाओं को इस दिन खान-पान के साथ कुछ विशेष नियमों का भी पालन करना चाहिए।

हल से उगी चीजों का सेवन न करें

हरछठ व्रत में हल से जोती गई जमीन पर उगे अनाज, सब्जियां और कंद-मूल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन गेहूं, चावल, दाल आदि अनाज से दूरी रखी जाती है। साथ ही तामसिक भोजन का भी त्याग करना चाहिए। व्रत में ऐसे फलाहार को प्राथमिकता दी जाती है, जो पानी में उगते हों।

गाय के दूध से बनी चीजें वर्जित होती है

हरछठ भगवान बलराम के जन्म से जुड़ा पर्व माना जाता है और इस दिन गायों के सम्मान की परंपरा भी है इसलिए व्रत के दौरान गाय के दूध, दही और घी से बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता। इनके स्थान पर भैंस के दूध, दही और घी का सेवन किया जा सकता है।

व्रत में क्या खा सकते हैं

हरछठ व्रत में भैंस के दूध से बनी चीजों के अलावा सिंघाड़ा, महुआ और पानी में उगने वाला पसही यानी तीना चावल ग्रहण करने की परंपरा बताई गई है । हालांकि अगल-अलग क्षेत्रों में व्रत के खान-पान और पारण की परंपराओं में थोड़ा अंतर भी देखने को मिलता है।

बाल-नाखून काटने से भी बचें

हरछठ के दिन बाल और नाखून काटने से बचने की मान्यता है। इसके अलावा पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने और सुई-धागे से जुड़े कार्य करने से भी परहेज किया जाता है। व्रत के दौरान झूठ बोलने, किसी को अपशब्द कहने, अमापन करने या किसी जरूरतमंद को घर की चौखट से खाली हाथ लौटाने से बचना चाहिए।

व्रत का पारण पूजा के बाद ऐसे करें

हरछठ व्रत आमतौर पर शाम के समय पूजा और कथा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है। कुछ क्षेत्रों में दही-चावल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा भी है । पूजा के दौरान महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। हर पुत्र के लिए छह छोटे मिट्टी के बर्तनों में पांच या सात भुने हुए अनाज या मेवा भरने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है।