हरियाणा के शिक्षा विभाग और स्कूल काडर लेक्चरर एसोसिएशन के बीच हुई बैठक में 1500 क्लस्टर स्कूलों में उप प्रधानाचार्य के पद सृजित करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही शिक्षकों की सुविधा के लिए चाइल्ड केयर लीव का ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा और तबादला प्रक्रिया दो हफ्तों में आरंभ होगी।
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी विद्यालयों और शिक्षकों के हित में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। प्रदेश के 1500 क्लस्टर स्कूलों में अब उप प्रधानाचार्य (वाइस प्रिंसिपल) के नए पदों को सृजित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त महिला शिक्षकों की सहूलियत के लिए बाल देखभाल अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) की संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के उद्देश्य से एक नया पोर्टल भी आरंभ किया जाएगा।
बैठक में बनी सहमति
माध्यमिक शिक्षा निदेशक और स्कूल काडर लेक्चरर एसोसिएशन (सलाह) के पदाधिकारियों के बीच आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि स्नातकोत्तर शिक्षकों (पीजीटी) की कन्फर्मेशन प्रक्रिया आगामी सप्ताह से प्रारंभ कर दी जाएगी। इसके साथ ही शिक्षक लंबे समय से जिस स्थानांतरण (तबादला) ड्राइव की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उसे भी अगले दो हफ्तों के भीतर शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारियों से आवश्यक डेटा मिलते ही योग्य पीजीटी शिक्षकों के स्थायीकरण की फाइल आगे बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, रिक्तियों की उपलब्धता के आधार पर प्रिंसिपल पद की पदोन्नति के लिए दोबारा आवेदन मांगे जाएंगे। चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) पर जाने वाली शिक्षिकाओं के कारण बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए विभाग ने सेवानिवृत्त अध्यापकों का एक पैनल तैयार कर उनके स्थान पर अस्थायी नियुक्तियां करने की योजना बनाई है।
मानकों के तहत अपग्रेडेशन
शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों को पूरा करने वाले हाई स्कूलों को क्रमबद्ध तरीके से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों (सीनियर सेकेंडरी) में अपग्रेड करने का खाका भी तैयार किया जा रहा है। वार्षिक सुनिश्चित पदोन्नति (एसीपी) के जितने भी मामले लंबे समय से अटके हुए हैं, उन्हें जल्द से जल्द निपटाने का आश्वासन दिया गया है।
चार्जशीट वापसी पर चर्चा
एसोसिएशन की ओर से बैठक में मांग रखी गई कि 10 फीसदी से कम बोर्ड परीक्षा परिणाम आने के आधार पर शिक्षकों को दी गई चार्जशीट वापस ली जाए। संगठन के प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि कई मामलों में शिक्षक के स्वयं के विषय का परिणाम बेहतर होने के बावजूद उन पर दंडात्मक कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही लेक्चरर पदनाम, चिकित्सा अवकाश, 35:1 का छात्र-शिक्षक अनुपात लागू करने, शैक्षणिक कैलेंडर समय पर जारी करने, छुट्टियों में ट्रेनिंग न रखने और विद्यालयों में भूगोल लैब बनाने जैसे बिंदुओं पर भी चर्चा की गई।

