प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन और पैसा बचाने की अपील के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उनके मंत्रियों ने अपने काफिले की गाड़ियों में भारी कटौती की है।
चंडीगढ़। हरियाणा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस अपील का व्यापक असर दिखाई दे रहा है, जिसमें उन्होंने पेट्रोल-डीजल बचाने और वीआईपी संस्कृति को कम करने के लिए वाहनों के काफिले में कटौती की बात कही थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस दिशा में पहल करते हुए गुरुवार को अपने आधिकारिक काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या को सीमित कर दिया। मुख्यमंत्री ने बुधवार रात को ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के माध्यम से सरकारी खजाने पर बोझ कम करने वाले उपायों को लागू करने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य न केवल ईंधन की बचत करना है, बल्कि आम जनता को सादगी का संदेश देना भी है।
काफिले में 15 की जगह केवल 4 गाड़ियां
आमतौर पर मुख्यमंत्री नायब सैनी के काफिले में प्रोटोकॉल और जेड प्लस (Z+) सुरक्षा के कारण 14 से 15 गाड़ियां शामिल रहती थीं। इसमें एनएसजी कमांडो, पुलिसकर्मी और स्टाफ की गाड़ियां होती थीं, जिनमें लगभग 55 जवान तैनात रहते थे। हालांकि, गुरुवार को जब मुख्यमंत्री अपने आवास से निकले, तो उनके काफिले में केवल चार गाड़ियां ही नजर आईं। सीएम की इस पहल का अनुसरण करते हुए कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा पंचकूला में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए साइकिल पर सवार होकर पहुंचे। इसी तरह, पानीपत से विधायक प्रमोद विज ने भी सादगी का परिचय देते हुए चंडीगढ़ आने के लिए अपनी निजी गाड़ी के बजाय ट्रेन का सफर चुना।
वरिष्ठ अधिकारियों और वीआईपी वाहनों की समीक्षा
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है और बीती रात आला अधिकारियों ने विभिन्न विभागों में तैनात वाहनों की समीक्षा की। इस नई व्यवस्था के तहत मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य वीआईपी श्रेणियों के लिए उपलब्ध गाड़ियों की संख्या की जांच की गई है। सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जहां एक से अधिक वाहन तैनात हैं, वहां उनकी संख्या को तत्काल प्रभाव से आधा किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से न केवल पर्यावरणीय लाभ होगा, बल्कि सरकारी राजस्व की भी बड़ी बचत होगी।
सुरक्षा और सादगी के बीच संतुलन की कोशिश
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना सुरक्षा अमले और स्टाफ के लिए न्यूनतम वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा। जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त होने के बावजूद, सीएम द्वारा गाड़ियों की संख्या घटाना प्रदेश की राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अधिकतर मंत्रियों और विधायकों ने भी स्वेच्छा से अपने फ्लीट में कटौती करना शुरू कर दिया है। सरकार की इस पहल को भविष्य में अन्य प्रशासनिक विभागों में भी कड़ाई से लागू करने की योजना है, ताकि जनता के बीच प्रशासन की एक जवाबदेह और मितव्ययी छवि बनी रहे।

